वासना रूपी रावण को जला लिया तो दशहरा हो गया

नवभारतटाइम्स.कॉम•
burning the ravana of lust is the true dussehra know its deep meaning
विजयादशमी या या दशहरा पर्व की दो मान्यताएं है- इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के बाद महिषासुर का नाश कर विजय प्राप्त की थी। यूं तो रावण सभी वेदों, उपनिषदों, दर्शनों आदि शास्त्रों का ज्ञाता था लेकिन उसमें अहंकार और अधर्म भी था। रावण दस सिर वाला तो था लेकिन उसका वासना से भरा मन बेकाबू था, जो उसके नाश का कारण बना। दशानन को जिस दिन हराया गया उस दिन को दशहरा कहा गया।

यह पर्व असत्य पर सत्य, अज्ञान पर ज्ञान, अंधकार पर प्रकाश, अमर्यादित जीवन शैली पर मर्यादित जीवन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय 'विजय' नामक मुहूर्त होता है, इसलिए यह काल सर्व कार्य सिद्धिदायक है। इसलिए इसे विजयादशमी कहते हैं। दशहरा दस पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के भावों पर विजय का पर्व है। नवरात्रि की साधना से साधक की कुंडलिनी शक्ति जाग कर चित्त में पड़े कुसंस्कारों का नाश कर देती है जिससे साधक विकारों, वासनाओं, इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने में समक्षम हो जाता है।
यदि स्वयं को मर्यादित कर अपने भीतर राम तत्व को जगाएं और भीतर वासना रूपी रावण को जलाया जाए तो समझना चाहिए कि दशहरा हो गया।

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