Development Hoarding Illusion Of Real fake Road Engineer Reveals New Reality
विकास का होर्डिंग
नवभारतटाइम्स.कॉम•
मैंने बालकनी से देखा, इंजीनियर साहब पैर से सड़क को टटोल कर चल रहे थे। घर के पास आकर उन्होंने दीवार को छूकर देखा। मुझे लगा, कुछ समस्या है। दौड़कर उनके पास गया, 'क्या हुआ?' वह बोले, 'कुछ नहीं, देख रहा था कि कहीं सब नकली तो नहीं।' मुझे समझ नहीं आया तो उन्होंने अखबार सामने कर दिया।
खबर थी कि एक ट्रक ड्राइवर को होर्डिंग पर बनी सड़क इतनी असली लगी कि उसी पर गाड़ी चढ़ा दी। मैंने इंजीनियर साहब की ओर देखा, वह बोले, 'बताइए, अब इसे चालक की गलती कहें या विज्ञापन की सफलता, यह तय करना मुश्किल है। सड़क की हालत ऐसी हो कि असली और नकली सड़क में फर्क करना मुश्किल हो जाए तो इसमें गलती आखिर किसकी है?' फिर बोले, 'हमारी सड़कों का स्तर इतना ऊंचा हो गया है कि अब सड़क के विज्ञापन भी असली जैसे लगने लगे हैं। यह विकास की बड़ी उपलब्धि है।' मैंने कहा, 'लेकिन ट्रक तो दुर्घटनाग्रस्त हो गया।' उन्होंने जवाब दिया, 'हर बड़े विकास के साथ कुछ छोटे-मोटे भ्रम पैदा होते हैं। जब मोबाइल पर लोग असली और नकली खबर में फर्क नहीं कर पा रहे, तो सड़क पर असली और नकली में थोड़ा भ्रम होना कौन-सी बड़ी बात है?' मैंने पूछा, 'तो समाधान क्या है?' इंजीनियर साहब बोले, 'होर्डिंग पर साफ-साफ लिख देना चाहिए- यह सड़क केवल देखने के लिए है, इस पर वाहन चलाना मना है।' फिर उन्होंने सुझाव दिया, 'हर असली सड़क पर एक क्यूआर कोड लगा देना चाहिए, जिसे स्कैन करके पता चले कि सड़क वास्तव में सड़क है या विज्ञापन।' अंत में मुझसे कहा, 'विकास का नया नियम यही है- सड़क दिखे तो खुश मत होइए, पहले पुष्टि कर लीजिए कि वह सड़क ही है।'