Oics Failure Islamic Organization Becomes Pawn Of Pakistans Agenda
OIC की नाकामी
नवभारतटाइम्स.कॉम•
इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) 57 देशों का समूह है, जिसका लक्ष्य है मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और उनके साझा हितों की रक्षा करना। लेकिन, यह संगठन अपनी भूमिका निभाने में असफल रहा है और वैश्विक मामलों में इसकी कमजोरी बार-बार उजागर हुई है। इसकी एक बड़ी वजह है कुछ देशों का इस मंच को अपने अजेंडे के लिए इस्तेमाल करना। हाल में OIC के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी यही हुआ, जहां भारत को लेकर टिप्पणियां की गईं।
भारत का विरोध । भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इन टिप्पणियों को दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और झूठा बताया है। भारत ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं। किसी को उसके आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह निराशा जताई कि इस्लामिक सहयोग संगठन ने एक बार फिर खुद को पाकिस्तान के कट्टर अजेंडे के लिए इस्तेमाल होने दिया। हालांकि इसमें कोई नई बात नहीं है।झूठ का सिलसिला । अंतरराष्ट्रीय मंचों की गरिमा के खिलाफ जाकर पाकिस्तान उनका दुरुपयोग करता रहा है। और OIC ने तो खासकर उसके झूठ का बोझ उठाया है। अब यहां सवाल संगठन से बनता है कि क्यों वह बार-बार खुद को ऐसे देश के हाथों खेलने दे रहा है, जिसकी विश्वसनीयता संदेह में है? क्या उसे अपने सभी सदस्यों के हितों और चिंताओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए? और क्या उन मुद्दों पर ऊर्जा नहीं लगानी चाहिए, जिनका असर व्यापक है?
असली मुद्दों से दूर । पश्चिम एशिया के हालात को संभालने में OIC बुरी तरह नाकाम रहा है। उसके सदस्य देशों, सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव जारी है। क्षेत्र के दूसरे देशों में भी अस्थिरता है। मंच को यहां शांति बहाल कराने की कोशिश करनी चाहिए। उसके प्रयास होने चाहिए गाजा में, जो इस समय गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है। साथ ही, उसे अफगानिस्तान की संप्रभुता का बार-बार उल्लंघन कर रहे पाकिस्तान के खिलाफ भी बोलना चाहिए। हकीकत यह है कि इस्लामाबाद खुद PoK में उभरे जन असंतोष की वजह से मुश्किलों में है। वहां मानवाधिकारों को बुरी तरह कुचला गया। यही हाल खैबर पख्तूनख्वा का है, जहां इमरजेंसी लगानी पड़ी है।
खाड़ी से करीबी । अगर OIC को इस्लामिक दुनिया की मजबूत आवाज बनना है, तो उसे वास्तविक मसलों पर ध्यान देना होगा। वहीं, भारत के नजरिये से देखें तो संगठन के ज्यादातर मुल्कों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्ते जुड़े हुए हैं। पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा से यह स्थिति नहीं बदलने वाली।