Victory Of Truth From Celebration To Governance The Resolve For Developed India
सत्य की विजय केवल उत्सव का संदेश नहीं, जीवन और शासन का संकल्प भी हो
नवभारतटाइम्स.कॉम•
आज दशहरे के पावन अवसर पर मैं सबसे पहले दिल्ली की समस्त जनता और सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देती हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से आज पूरा देश ‘ विकसित भारत ’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसी तरह हम लोग भी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में दिल्ली को एक स्वच्छ, सुंदर और विकसित दिल्ली बनाने के लिए संकल्पबद्ध हैं और इसके लिए तेजी से काम कर रहे हैं।
दिल्ली की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, जो नवरात्र के दौरान अपने भव्य स्वरूप में दिखाई देती है। एक तरफ पूरी दिल्ली में जगह-जगह रामलीलाओं का आयोजन होता है, तो वहीं दूसरी तरफ शहर के विभिन्न हिस्सों में दुर्गा पूजा की भी अलग ही रौनक नजर आती है। इन दोनों के साथ अब बड़े पैमाने पर गरबा, डांडिया और भजन क्लबिंग इवेंट्स भी होने लगी हैं, जो हमारे युवाओं, खासकर जेन-Z को हमारे इन उत्सवों से जोड़ने का काम कर रही हैं। दिल्ली की हमारी सरकार इन सभी आयोजनों को सफल बनाने के लिए हरसंभव योगदान दे रही है। चाहे वह आयोजनों की परमिशन को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम लागू करना हो या मंत्रियों की अध्यक्षता में कमिटी बनाकर आयोजकों की अन्य समस्याओं का समाधान करना हो, हमारी सरकार पूरी तत्परता से यह सुनिश्चित कर रही है कि इन आयोजनों में किसी भी प्रकार की कोई अड़चन न आए। जल्द ही दीपावली और छठ पूजा आएगी, जिसके लिए हम यमुना की सफाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई जरूरी कदम उठा रहे हैं। हमारी यही कोशिश है कि पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए हम अपने सभी तीज-त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाएं और पिछली सरकारों की गलतियों को ना दोहराएं।भारत की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह हर उत्सव में जीवन का कोई न कोई गहरा संदेश समेटे रहती है। नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना और दशहरे पर भगवान श्रीराम की विजय हमें शक्ति, मर्यादा, न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और दिल्ली को एक आधुनिक, स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधा संपन्न राजधानी बनाने का हमारा प्रयास जारी है, तब इन पर्वों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
आज दुनिया भारत को केवल एक बड़े बाजार या विशाल आबादी वाले देश के रूप में नहीं देखती। भारत की डिजिटल क्षमताएं, अंतरिक्ष कार्यक्रम, स्टार्टअप संस्कृति, आर्थिक संभावनाएं, लोकतांत्रिक परंपराएं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती भूमिका हमारी नई पहचान बना रही हैं। योग से लेकर त्योहारों तक, हमारी सांस्कृतिक परंपराएं दुनिया के लोगों को भारत से जोड़ती हैं। यह लोकप्रियता हमारे लिए गौरव के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है। हमें अपने आचरण, कार्यक्षमता और उपलब्धियों से इस विश्वास को मजबूत करना है। सत्य की विजय केवल उत्सव का संदेश नहीं, बल्कि हमारे जीवन और शासन का संकल्प भी होना चाहिए।
दुर्गा पूजा हमें नारी शक्ति के सम्मान और उसकी सामर्थ्य का स्मरण कराती है। वहीं, दशहरा हमें सिखाता है कि अहंकार, अन्याय और छल कितने ही शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। इस दुर्गा पूजा और दशहरे पर हम अपने भीतर की बुराइयों को पहचानने और उन्हें दूर करने का संकल्प लें। हम ऐसा समाज बनाएं, जहां शक्ति का उपयोग संरक्षण के लिए, ज्ञान का उपयोग निर्माण के लिए और विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए हो। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रतिबद्धता, नागरिकों की भागीदारी और युवाओं की ऊर्जा से विकसित दिल्ली का सपना अवश्य साकार होगा। यही विकसित भारत की यात्रा में हमारा सबसे महत्वपूर्ण योगदान होगा।