Aryan Arrival In India A Myth What Archaeological And Scientific Evidence Says
एक कल्पना है आर्यों का भारत आना
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भारतीय समाज मूल निवासियों और मध्य एशिया से आए लोगों से बना है। बाहरी लोगों को आर्य पुकारा गया। Filippo Sassetti से लेकर मैक्स मूलर तक का मत था कि 1500 ईसा पूर्व आर्य भारत आए थे। मोहनजोदड़ो के उत्खनन कर्ता मॉर्टिमर वीलर ने पुरातात्विक साक्ष्यों से इसे आर्य आक्रमण सिद्धांत कहा। लेकिन, अमेरिकी पुरातत्वविद् जॉर्ज एफ डेल्स ने इसका खंडन कर दिया। तब आर्य आगमन सिद्धांत सामने आया, जिसके अनुसार आर्यों के आगमन से पहले की मूलनिवासी सभ्यता हड़प्पा थी और बाद में आर्यों के कारण उन्होंने दक्षिण भारत की ओर पलायन किया। अब सवाल यह है कि क्या पुरातात्विक और वैज्ञानिक साक्ष्य वास्तव में इस मत का समर्थन करते हैं?
यज्ञ और घोड़े । यज्ञ आर्य संस्कृति का अभिन्न अंग है। हड़प्पा सभ्यता के कई प्रमुख स्थलों, जैसे राखीगढ़ी, लोथल, कालीबंगा, बिंजौर और बनावली से उत्खनन में यज्ञकुंड मिले हैं। यानी, लगभग 4300 वर्ष पहले इस सभ्यता के लोग यज्ञ करते थे। ऐसे में हड़प्पा सभ्यता को आर्यों से पूरी तरह अलग कैसे माना जा सकता है! घोड़े की उपस्थिति का सवाल भी चर्चा का विषय रहा है। इतिहास की पुस्तकों में बताया गया कि हड़प्पा सभ्यता के लोग घोड़े से परिचित नहीं थे, इसलिए इसे आर्यों की सभ्यता नहीं मान सकते। लेकिन, गुजरात के सुरकोटदा, लोथल और रंगपुर जैसे हड़प्पाई स्थलों से पालतू घोड़े की हड्डियां मिली हैं। राखीगढ़ी और लोथल से घोड़े की मिट्टी की मूर्तियां भी मिली हैं।DNA का सवाल । यदि 1500 ईसा पूर्व मध्य एशिया से बड़ी संख्या में लोग आए तो उस समय के कंकालों के DNA में अनुवांशिक बदलाव या मिश्रण के स्पष्ट संकेत क्यों नहीं मिले? मानवशास्त्री कैनेडी और लुकॉक्स की प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में 4500 ईसा पूर्व से लेकर 800 ईसा पूर्व तक मानव जैविक बनावट एक जैसी है। ऐसे में 500 ईसा पूर्व के आसपास कोई विशाल माइग्रेशन की बात आसानी से गले नहीं उतरती।
घग्गर ही सरस्वती । ऋग्वेद में जिस नदी का सर्वाधिक उल्लेख है, वह है सरस्वती। आरएस शर्मा जैसे विद्वानों ने अफगानिस्तान की हरकावती नदी को ही सरस्वती बता दिया। लेकिन, ऋग्वेद में सरस्वती का वर्णन पर्वतों से निकलने वाली और समुद्र में समा जाने वाली नदी के रूप में है, जबकि हरकावती समुद्र में नहीं मिलती। अब भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण बताते हैं कि हरियाणा-राजस्थान की घग्गर नदी ही प्राचीन सरस्वती है, जिसके किनारे 64% हड़प्पाई नगर स्थित थे।
सबूत नहीं । कुल मिलाकर, आर्य आगमन सिद्धांत के समर्थन में किए गए दावों के पुरातात्विक साक्ष्य नहीं हैं। हां, भाषा को लेकर आज भी कई प्रश्न हैं। निश्चित तौर पर लैटिन और संस्कृत में कुछ समानताएं हैं। हड़प्पाई लोगों के दक्षिण पलायन के भी ठोस प्रमाण नहीं हैं। गंगा-यमुना दोआब में हड़प्पा सभ्यता के परवर्ती काल के सैकड़ों पुरास्थल संकेत करते हैं कि लगभग 1900-1800 ईसा पूर्व प्रतिकूल परिस्थितियों, विशेषकर सरस्वती नदी के सूखने के बाद, इस सभ्यता के लोगों ने दोआब की ओर रुख किया होगा।
(लेखक शहीद भगत सिंह महाविद्यालय के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रफेसर हैं)