गणेशोत्सव में जली आज़ादी की मशाल

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ganeshotsav from the torch of freedom to mumbais biggest festival
अनगिनत घरों में गणपति आने वाले हैं। मुंबई करों के लिए सबसे बड़ा त्योहार। खूबसूरत और विशाल गणपति मूर्तियां तैयार हो चुकी हैं। उन्हें पंडालों में स्थापित करने की तैयारियां हो रही हैं। यूं तो पूरे महाराष्ट्र में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन मुंबई की बात कुछ और है। मुंबई में ऐतिहासिक लाल बाग का राजा से लेकर मोहल्लों, सोसायटियों के गणपति पंडालों में आस्था से भरे मन कितने ही प्रमुदित लगते हैं। कैसा तो नजारा होता है, जब यहां देश-दुनिया से लोग गणेश उत्सव देखने भागे आते हैं।

मंडलों में मीटिंग । गणेश उत्सव अब हमें एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन लग सकता है, लेकिन इसका अतीत जंग-ए-आजादी से भी जुड़ा हुआ है। ग़ुलामी के दौर में जब पॉलिटिकल रैलियां करना आसान नहीं था, पॉलिटिकल आयोजनों पर जब अंग्रेज अफसरों की नज़र रहती थी, तब 1893 के आसपास पुणे में बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक गणेश मंडलों के द्वारा अलग-अलग वर्गों के लोगों को इकट्ठा किया और ये सांस्कृतिक आयोजन आजादी की अलख जगाने लगे। पुणे के बाद मुंबई में भी सार्वजनिक गणेश उत्सव मनाया जाने लगा। लाल बाग के राजा का आयोजन उसी दौर में शुरू हुआ था।
लालबागचा राजा । ‘लालबागचा राजा’ की स्थापना 1934 में हुई मानी जाती है। कहा जाता है कि उस इलाके के पेरू चॉल क्षेत्र के मछुआरों और विक्रेताओं को बाज़ार की जगह और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने गणपति से मन्नत मांगी कि उनकी समस्या दूर हो जाए। बाद में समस्या सुलझने पर उन्होंने सार्वजनिक गणपति की स्थापना की। यही परंपरा आगे चलकर लालबागचा राजा के रूप में प्रसिद्ध हुई।

वैश्विक बना राजा । शुरुआत में लालबागचा राजा के आयोजन में गिरणगांव और आसपास के श्रद्धालु ही आते थे। तब मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती थीं। ये मूर्तियां अलग-अलग स्वरूपों में भी बनाई जाती रहीं। कभी भगवान राम, कभी कृष्ण, तो कभी विष्णु का स्वरूप इन मूर्तियों में दिखा। इतना ही नहीं, जंग-ए-आज़ादी के दिनों में सामाजिक और राष्ट्रीय प्रतीक भी गणेश प्रतिमाओं में दिखे। लालबागचा राजा का आयोजन 1990 के बाद विशाल होता गया। इस आयोजन में जब फिल्मी सितारे और उद्योगपति पहुंचने लगे, तो यह काफी लोकप्रिय होने लगा और दूरदराज से लोग आने लगे। अब तो पूरी दुनिया से लोग यहां पहुंचते हैं।