Patience The Power To Awaken Hope In Difficulties The Fundamental Mantra For Success In Life
धैर्य हो तो मुश्किल हालात में भी बनी रहती है उम्मीद
Contributed by: मुनि जयकुमार|नवभारतटाइम्स.कॉम•
मनुष्य के जीवन में धैर्य और संयम का विकास बहुत आवश्यक है। इसके अभाव में व्यक्ति छोटी-छोटी परिस्थितियों में भी विचलित हो जाता है। बाहरी घटनाएं और परिस्थितियां हमें बहुत जल्दी प्रभावित करती हैं। ऐसे में मनुष्य अपना धैर्य खो बैठता है और उसके भीतर तत्काल प्रतिक्रिया की भावना पैदा हो जाती है। अक्सर यही प्रतिक्रिया उस काम को बिगाड़ देती है, जिसे थोड़े धैर्य और विवेक से आसानी से संभाला जा सकता था। धृति जीवन की एक महत्वपूर्ण शक्ति है- धैर्य, दृढ़ता और मन को स्थिर रखने की क्षमता। धैर्य वह शक्ति है, जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी संभाले रखती है और बिगड़े हुए काम को सुधारने का अवसर देती है। जिसके पास शारीरिक बल के साथ मनोबल और आत्मबल भी मजबूत होता है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी आसानी से विचलित नहीं होता।
धैर्य मनुष्य को यह विश्वास देता है कि समय अनुकूल होने पर परिणाम अवश्य मिलेगा। किसी दार्शनिक से पूछा गया कि धैर्य की सीमा क्या है? उसने सहज उत्तर दिया, ‘जब तक छलनी में पानी न जम जाए।’ यह उत्तर बताता है कि धैर्य का अर्थ केवल प्रतीक्षा करना नहीं, असंभव लगने वाली परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखना है। मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह हर सफलता तुरंत चाहता है। लेकिन, क्या बीज बोने के साथ ही फल मिल सकता है? प्रकृति हमें सिखाती है कि हर उपलब्धि का अपना समय होता है। आज बोया गया बीज कल ही वृक्ष नहीं बन सकता। उसे मिट्टी, पानी, धूप और समय - सबकी जरूरत है। जीवन में सफलता भी इसी तरह धीरे-धीरे आकार लेती है।धैर्य हमारे जीवन-व्यवहार का दर्पण है। क्रोध में तुरंत प्रतिक्रिया देना, वाणी का विवेक खो देना और बिना सोचे निर्णय लेना इस दर्पण को धुंधला कर देता है। हर बात का तुरंत जवाब देना आवश्यक नहीं। कई बार ठहर जाना ही सबसे समझदार प्रतिक्रिया होती है। यदि जीवन में शांति, संतुलन और आनंद चाहते हैं, तो धृति को अपनाना होगा। धैर्य हमें केवल सफलता तक नहीं पहुंचाता, सफलता के योग्य भी बनाता है।