Sco Summit A New Opportunity For India To Counter China
चीन को साधने का मौक़ा आ रहा
नवभारतटाइम्स.कॉम•
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन हुआ। संगठन के 25 साल पूरे होने पर बिश्केक घोषणा अपनाई गई। सम्मेलन में आतंकवाद, नशीली दवाओं की तस्करी, ऊर्जा, डिजिटल सहयोग, ग्रीन टेक्नॉलजी और कनेक्टिविटी से जुड़े 28 दस्तावेज स्वीकृत हुए। भारत के लिए यह सम्मेलन मध्य एशिया-यूरेशिया में रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आतंकवाद विरोधी सहयोग सुदृढ़ करने के लिहाज से अहम है।
कई मुद्दों पर सहमति । सम्मेलन का केंद्रीय दस्तावेज ‘बिश्केक घोषणा’ है, जो SCO के 25 वर्षों की उपलब्धियों के साथ भविष्य की दिशा तय करता है। सदस्य देशों ने SCO चार्टर में संशोधन, सुरक्षा चुनौतियों से निपटने वाले यूनिवर्सल सेंटर और SCO एंटी-नार्कोटिक्स सेंटर के विनियमों को मंजूरी दी। पर्यावरण और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में 2026–2031 की जैव विविधता संरक्षण पहल और 2026–2030 के ग्रीन टेक्नॉलजी कॉरिडोर की योजना बनी। बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के विकास का रोडमैप भी मंजूर हुआ। AI, डेटा सेंटर और ऊर्जा प्रणालियों में सहयोग पर घोषणापत्र जारी किए गए।भारत को फायदा । बिश्केक घोषणा में सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ सहयोग मजबूत करना है। यह देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं से मेल खाता है। ‘यूनिवर्सल सेंटर फॉर काउंटरिंग चैलेंजेज एंड थ्रेट्स’ के नियमों से भारत को SCO साझेदारों के साथ आतंकवाद, सीमा-पार अपराध और नशीली दवाओं की तस्करी पर जानकारी साझा करने का मंच मिलेगा। 2030 तक नशा-मुक्ति और सिंथेटिक ड्रग्स पर कार्यक्रम भारत-पाक-अफगान क्षेत्र में नार्को-टेररिज्म से निपटने में मददगार होंगे। इस तरह SCO भारत के लिए सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।
भरोसेमंद भागीदार । ऊर्जा सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में SCO के फैसले भारत की दीर्घकालिक रणनीति के अनुकूल हैं। बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के विकास के रोडमैप से भारत को उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाकिस्तान के साथ व्यापार मार्ग सुगम बनाने में मदद मिलेगी। ‘ग्रीन टेक्नॉलजी कॉरिडोर’ और ऊर्जा सहयोग भारत की नवीकरणीय ऊर्जा व ग्रीन हाइड्रोजन पहलों के अनुरूप हैं। इससे मध्य एशिया में भारत ऊर्जा आपूर्ति में भरोसेमंद भागीदार बन सकता है।।
BRI पर संदेश । उज्बेकिस्तान के साथ हालिया यूरेनियम समझौते और रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए SCO भारत को मध्य एशियाई ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच और आपूर्ति विविधीकरण का अवसर देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया। यह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर भारत की चिंताओं का संकेत है। साथ ही, SCO के भीतर भारत अपनी शर्तों पर कनेक्टिविटी एजेंडा आगे बढ़ा सकता है।
त्रिपक्षीय बातचीत । 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन और रूस के बीच दोबारा त्रिपक्षीय बातचीत शुरू होना अहम रहा। यह सीमा तनाव और वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पूतिन और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बातचीत में भारत-चीन सीमा प्रबंधन के लिए पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन पर सहमति बनी। इससे तनाव कम करने और दुर्घटनाओं से बचने में मदद मिलेगी।
चीन से चिंता । रूस के साथ ऊर्जा, रक्षा और यूरेनियम आपूर्ति सहयोग भी मजबूत हुआ। हालांकि, SCO में चीन के बढ़ते प्रभाव की चिंता है। फिर भी, यह मंच भारत को अपने हितों की रक्षा और विश्वसनीय हितधारक के रूप में भूमिका मजबूत करने का अवसर देता है।
उपयोगिता पर सवाल । शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की उपयोगिता पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि SCO धीरे-धीरे चीन के प्रभाव वाला मंच बन रहा है, जहां छोटे देशों की आवाज दब सकती है। भारत के लिए चुनौती अपने हितों से समझौता किए बिना चीन के अजेंडे को संतुलित करना है। पाकिस्तान की मौजूदगी और आतंकवाद पर मतभेद भी चिंता का विषय हैं।
नए अवसर । कुल मिलाकर, 26वें SCO शिखर सम्मेलन और बिश्केक घोषणा से भारत को सुरक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और डिजिटल सहयोग में नए अवसर मिले हैं। आतंकवाद और नार्को-टेररिज्म पर सहयोग भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं के अनुरूप है। मध्य एशिया में ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स पहल भी अहम हैं। भारत-चीन-रूस संवाद से रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत हुई है। चीन के बढ़ते प्रभाव की चिंता के बावजूद, SCO भारत के लिए क्षेत्रीय पहुंच और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
(लेखक JNU के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान में प्रफेसर हैं)