Again And Again Potholes Gen Z Finds A Unique Way To Expose Administrations Incompetence
फिर-फिर गड्ढे
नवभारतटाइम्स.कॉम•
पड़ोस के उस Gen Z छोकरे ने मेरे हाथ में एक अखबार और एक पेंसिल थमाते हुए कहा, 'अंकल, इस अखबार के दो अलग पन्नों में दो अलग सड़कों पर बने गड्ढों की फोटोज हैं। आप इन गड्ढों में 5 अंतर निकाल कर दिखा दीजिए, तो जानूं!' मैंने चकित होकर उससे अखबार लिया और बड़े ध्यान से उलटा-पलटा। वाकई दो अलग एरिया की फोटो होने के बावजूद इन दोनों गड्ढों में गजब की समानता थी। असल में 5 अंतर ढूंढ़ने वाली चुनौती देकर Gen Z अपने ढंग से प्रशासन का निकम्मापन उजागर कर रहा था। लेकिन, यहां तो स्थिति थी कि अंतरों पर निशान लगाने वाली वह पेंसिल एक इंच भी नहीं हिल पा रही थी।
मुझे याद आया, पिछले साल भी तो इस छोकरे ने कुछ इसी अंदाज में दो गड्ढों में अंतर ढूंढ़ने का चैलेंज दिया था। तब भी मैं इतना ही लाचार और वह इसी तरह मुस्कुराता नजर आया था। मानो कि ये गड्ढे न होकर, कोई मजेदार खेल हों! सरकार और भ्रष्टाचार का कोई घालमेल हों! मैं विचार में पड़ गया कि क्या साल-दर-साल म्युनिसिपालिटी में होता रहता है झोल? देखते ही देखते करोड़ों रुपये हो जाते हैं गोल! हद ही है यार, जनता के साथ धोखे का यह कैसा है व्यवहार? करोड़ों में है गड्ढे भरवाने का बजट, तो इतने सारे रुपयों का ऊंट बैठता है किस करवट?मैं अखबार में छपी गड्ढों की तस्वीरों को विस्मय से देखे जा रहा था और किसी तुक्कड़ कवि की तरह बड़बड़ा रहा था। तभी Gen Z छोकरे ने मेरे हाथ से यह कहते हुए अखबार वापस ले लिया कि आपसे ना हो पाएगा। किसी जेन अल्फा की शरण में जाना पड़ेगा।