Saty Niketan Building Collapse Shakes Student Politics Deep Impact On Dusu Elections
छात्र राजनीति को हिला देगी यह गिरी इमारत
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भूपेंद्र शर्मा
दिल्ली में छात्र संघ चुनाव से ठीक पहले सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना का छात्र राजनीति पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए वोटिंग में अब कुछ ही दिन बचे हैं। इस बार का चुनाव हॉस्टल और सेफ पीजी के दो बड़े मुद्दों पर ही केंद्रित रहने वाला है। सत्य निकेतन की घटना सीधे छात्रों की सुरक्षित आवास सुविधा, हॉस्टल की कमी और पीजी की बदहाल व्यवस्था से जुड़ी है। हादसे में जान गंवाने वालों में छात्र भी हैं।हादसे से DU प्रशासन की कलई तो खुल ही गई है, साथ ही राजनीतिक दलों पर भी छात्र सवाल उठा रहे हैं। स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में हर संगठन किसी राजनीतिक पार्टी या विचारधारा से जुड़ा होता है, लेकिन इस बार चुनाव सत्य निकेतन से जुड़े मुद्दों पर लड़ा जाना है। छात्र संगठनों को भी यह पता है।
मुद्दों का हल निकालना होगा
DU में हॉस्टल और यू-स्पेशल बसें ऐसे मुद्दे रहे हैं, जो कई दशकों से हर चुनाव में छात्रों के बीच चर्चा में आते हैं। खास बात यह है कि दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भी इन मुद्दों को सभी दल अपने घोषणा पत्र में जगह देते हैं। BJP, कांग्रेस, AAP समेत हर पार्टी की छात्र इकाई है। अब सवाल यह है कि वर्षों से उठाए जा रहे इन बुनियादी मसलों का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया, कितने नए हॉस्टल बने, कितने छात्रों को वास्तव में आवास मिला, निजी पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा की निगरानी कौन कर रहा है? और, देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले छात्रों को बड़ी संख्या में निजी पीजी या किराए के कमरों का सहारा क्यों लेना पड़ता है?
छात्रों के आंदोलन बड़े-बड़े बदलाव कर देते हैं। DU की छात्र राजनीति को भी बदलना होगा। सिर्फ मुद्दे उठाने की बजाय उन्हें निर्णायक अंत तक पहुंचाना होगा।
दिखने लगा है असर
छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सत्य निकेतन की घटना को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू की है। हालांकि केंद्र से लेकर दिल्ली और MCD में BJP की सरकार है, लेकिन ABVP खुलकर इस मुद्दे पर प्रशासन की लापरवाही की बात उठा रहा है। संगठन छात्रों तक यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह पूरी तरह उनके साथ है और इस मसले पर किसी भी तरह की पार्टी पॉलिटिक्स की गुंजाइश नहीं होगी।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब DU की छात्र राजनीति सक्रिय है। कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI सहित दूसरे छात्र संगठनों ने भी सक्रियता बढ़ाई है। इससे चुनावी बहस 'कैंपस के अंदर की राजनीति' से निकलकर 'कैंपस के बाहर छात्रों की जिंदगी और सुरक्षा' तक जाना तय है। आने वाले समय में ABVP-NSUI के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होंगे।
DUSU से निकले दिग्गज
DU छात्र राजनीति से कई दिग्गजों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। BJP और कांग्रेस के कई बड़े नेता DU छात्र राजनीति से ही निकले हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, विजय गोयल, अलका लांबा, रागिनी नायक समेत कई नेताओं की पहचान DUSU से हुई। वहीं दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी DU छात्र राजनीति से नाम कमाया था। अब सवाल यह है कि DU छात्र राजनीति से नगर निगम, विधानसभा और संसद तक पहुंचने वाले नेताओं ने भी कभी हॉस्टल का मुद्दा उठाया था, तो आज तक यह समस्या हल क्यों नहीं हो पाई?