Putins India Visit Special Report On Brics Summit And Strong India russia Partnership
दोस्ती का संदेश
नवभारतटाइम्स.कॉम•
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन के भारत आने की पुष्टि हो गई है। चर्चा तो चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के दौरे को लेकर भी है, पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पूतिन और अगर शी आते हैं तो - इन दोनों ही यात्राओं का मकसद BRICS शिखर सम्मेलन है, पर इससे ज्यादा महत्व होगा बैठक के इतर होने वाली द्विपक्षीय मुलाकातों का।
मजबूत साझेदारी । पूतिन और पीएम नरेंद्र मोदी इस शुक्रवार को जब मिलेंगे तो अजेंडे में भारत-रूस संबंधों के साथ बदलते वैश्विक समीकरण भी होंगे। पूतिन ऐसे वक्त आ रहे हैं, जब रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध हैं और भारत पर भी उसके साथ कारोबार को लेकर दबाव बना हुआ है। ऐसे में यह यात्रा संदेश देगी कि दोनों देशों की खास रणनीतिक साझेदारी अब भी मजबूत है। हाल ही में बिश्केक में भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी, जहां रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई थी। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर रूस गए थे और तब 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य पर चर्चा हुई थी।बढ़ता व्यापार । यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग तीन गुना हुआ है। इसमें बड़ा हिस्सा तेल का है। पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से पिछले साल इसमें कुछ गिरावट आई थी, लेकिन अब फिर तेजी है। इसकी एक प्रमुख वजह यह भी है कि दोनों देशों ने रुपये और रूबल में भुगतान की व्यवस्था को बेहद मजबूत कर लिया है। हालांकि इसे डॉलर को खत्म करने की मुहिम के रूप में देखना उचित नहीं होगा। खुद रूस ने भी यह बात स्पष्ट कर दी है। अहम है कि दो पुराने साझेदारों के बीच व्यापार की सहूलियत बनी रहनी चाहिए।
यूक्रेन पर बात । मोदी-पूतिन बैठक में रक्षा सहयोग सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। खास तौर पर रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 की तकनीक और सहयोग पर बातचीत की संभावना है। यूक्रेन युद्ध को लेकर चर्चा भी संभव है। अमेरिका-ईरान संघर्ष से हटकर रूस-यूक्रेन फिर से फोकस में आए हैं। भारत का पुराना स्टैंड रहा है कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।
शांति में भूमिका । पिछले हफ्ते कीव में जयशंकर ने कहा था कि भारत युद्ध खत्म करने में मदद के लिए तैयार है। इस मुद्दे पर संवाद का सीधा मौका मिल सकता है। कुल मिलाकर, पूतिन की यात्रा सिर्फ पश्चिम को संदेश देने का मौका नहीं, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और कूटनीतिक संतुलन को दिखाने का अवसर भी है।