जायज़ चिंता

नवभारतटाइम्स.कॉम
ais growing threat is human civilization in danger
क्या AI इतनी ताकतवर हो सकती है कि इंसानी सभ्यता के लिए खतरा बन जाए? अब यह सवाल बार-बार उठ रहा है। एंथ्रोपिक रिसर्चर Jacob Coxon ने भी यही वजह गिनाते हुए इस्तीफा दिया है। अतिशयोक्ति मान लें, तो भी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से जुड़ी उनकी चिंताओं को व्यक्तिगत सोच मानकर खारिज करना सही नहीं होगा।

टूट रहे नियम । सबसे बड़ी चिंता AI को लेकर चल रही होड़ है। कॉक्सन के मुताबिक, बाजार का दबाव कंपनियों को इतनी तेजी से आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहा है कि सेफ्टी रिसर्च का काम पीछे छूट जा रहा। AI से आज जिस तरह के काम कराए जा रहे हैं, उससे गलती की गुंजाइश और उसके असर का खतरा भी बढ़ रहा है। इसके कुछ उदाहरण हाल में सामने आए, जहां AI एजेंट्स ने तय रूट के बाहर जाकर काम किया या किसी सिस्टम में अनाधिकृत घुसपैठ कर ली। अगर कोई AI मॉडल दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऐसी राह चुनने लगे, जिसकी उम्मीद उसे बनाने वालों ने भी नहीं की थी, तो यह गंभीर चूक है।
समझ का फर्क । AI को लेकर चेतावनी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जितने शक्तिशाली मॉडल बन रहे हैं, उनके भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया उतनी ही जटिल और कम पारदर्शी होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति अचानक आई। मार्च 2023 में इलॉन मस्क, एपल के को-फाउंडर Steve Wozniak समेत कई हस्तियों ने AI के डिवेलपमेंट को लेकर चेताया था।

बदलाव की ताकत । इसके अलावा, एक बड़ी चिंता पर्यावरण को लेकर है। भारी-भरकम सर्वर और डेटा सेंटर बहुत बड़ी मात्रा में बिजली-पानी की खपत कर रहे हैं। इनकी वजह से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है। हालांकि इन सारी बातों का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि तकनीक को यहीं पर रोक दिया जाए। AI ने मेडिकल, एजुकेशन, साइंस, रिसर्च और एग्रो सेक्टर में बड़े बदलाव की क्षमता दिखाई है। आज संसाधनों पर जितना दबाव है और दुनिया के सामने जिस तरह की चुनौतियां हैं, उनमें AI सहयोगी हो सकती है।

कड़ी निगरानी । OpenAI के मुख्य वैज्ञानिक Jakub Pachocki ने हाल में कहा था कि AI जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसके लिए इंसान तैयार नहीं हैं। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की सुरक्षा और निगरानी पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सरकारों और दूसरी संस्थाओं को भी इसमें भूमिका निभानी होगी। केवल कंपनियों के भरोसे सब नहीं छोड़ा जा सकता। बेलगाम होड़ के बजाय सिक्योरिटी को प्राथमिकता देनी चाहिए और सबसे जरूरी, इस क्षेत्र से जुड़ी आवाजों को गंभीरता से सुनना चाहिए।