समय से पहले आ रहा बुढ़ापा, उपाय आयुर्वेद में

Contributed byशशांक जोशी|नवभारतटाइम्स.कॉम
premature aging ayurveda holds the solution know how
दुनिया के टॉप मेडिकल जर्नल Nature Medicine में प्रकाशित एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ाने वाला सवाल उठाया है- क्या हमारे बच्चे उम्र के मुकाबले ज्यादा तेजी से बूढ़े हो रहे हैं? वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन के 1.54 लाख युवाओं पर अध्ययन किया। इसमें एक अजीब ट्रेंड सामने आया। 40 साल की समान उम्र में 1970 में पैदा हुआ व्यक्ति, 1955 में पैदा हुए व्यक्ति की तुलना में जैविक रूप से ज्यादा बूढ़ा मिला। पुरुषों में यह अंतर खासकर अधिक था। जैविक उम्र बेहद मायने रखती है। जिन लोगों की जैविक उम्र उनकी वास्तविक उम्र से ज्यादा थी, उनमें 55 से पहले कैंसर होने का खतरा भी अधिक पाया गया। फेफड़ों, पेट और आंत के कैंसर का रिस्क ज्यादा मिला।

हमारे वेदों में उम्र कभी जन्मदिन से नहीं गिनी जाती थी। उम्र समझी जाती थी बल, ओज और जरा से। बल यानी ताकत, ओज यानी resilience और जरा का अर्थ है क्षय। आधुनिक विज्ञान ने इसी विचार पर एक ब्लड टेस्ट बनाया है, PhenoAge। यह टेस्ट कोई महंगा नहीं है। इसमें ब्लड रिपोर्ट में 9 चीजें देखी जाती हैं, मसलन - शुगर, किडनी की सेहत, ब्लड सेल्स, पोषण। प्राचीन वैदिक चिकित्सा में इसे रस-रक्त परीक्षा कहते हैं। आपका खून आपकी जीवनशैली का आईना है। और यहीं पर स्टडी राज खोलती है कि जिनकी जैविक उम्र ज्यादा थी, उनका वजन भी ज्यादा था। साथ में, स्मोकिंग, खराब डाइट, कम एक्सरसाइज और अधिक तनाव।
यानी, हम किसी जीन की वजह से नहीं, अपनी लाइफस्टाइल की वजह से तेजी से बूढ़े हो रहे हैं। दिन-प्रतिदिन खराब होती हमारी जीवनशैली असमय हमें बूढ़ा बना रही है। आयुर्वेद में इसे अकाल जरा कहा गया है, समय से पहले उम्र ढलना। इसके पीछे है प्रज्ञापराध - अपनी बुद्धि की गलती। गलत खाना, गलत रूटीन, गलत आदतें। हमें लगता है कि बीमारी 50 की उम्र में शुरू होती है। कैंसर, हार्ट अटैक और डायबिटीज अचानक आते हैं। लेकिन वेदों में कहा गया है कि बीमारी अपने दिखने से 20 साल पहले ही शुरू हो जाती है। पूर्वरूप से पहले रूप आता है। यह स्टडी भी यही बताती है। जो कैंसर 45 की उम्र में दिखता है, असल में उसकी शुरुआत 25 या 30 में हो चुकी होती है।

तो समय से पहले बूढ़ा होने से बचने का उपाय क्या है? महंगी एंटी-एजिंग दवाएं बिल्कुल नहीं। हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले ही स्वस्थ जीवन का रास्ता बताया था। आधुनिक विज्ञान अब ब्लड टेस्ट के जरिए उसे ही साबित कर रहा है। पहला उपाय है आहार शुद्धि। सही और मौसम के अनुसार भोजन करें। घर का बना हो और प्रॉसेस्ड कम हो। इसके बाद ‘नित्य विहार’, यानी हर दिन शरीर को सक्रिय रखें। पैदल चलें, योग और सूर्य नमस्कार करें। 7-8 घंटे की नींद लें, क्योंकि नींद में शरीर खुद की मरम्मत करता है। अगला है ‘व्यसन त्याग’, शराब और सिगरेट से दूरी। स्टडी में पाया गया कि फेफड़ों की जैविक उम्र सबसे तेजी से बढ़ रही थी। संदेश है- जीवनशैली की रफ्तार धीमी कीजिए, उम्र बढ़ने की रफ्तार भी धीमी होगी।