'गजब हाल है भाई साब! कुछ भी पूछ लीजिए, चाहे जितना कठिन सवाल हो, फटाक से जवाब मिलता है। आधा-अधूरा नहीं, पूरा 100%। मान गए हम तो।' मॉर्निंग वॉक में मिलते ही श्रीमान क शुरू हो गए। 'मानना ही पड़ेगा। आपने दामाद भी तो चिराग लेकर खोजा है। टॉल, डार्क, हैंडसम और इंटेलिजेंट भी। पर इंटेलिजेंस वैसे कहिए तो आपकी ही है।'
पिछले सालभर से श्रीमान क अपनी बिटिया के लिए चेक-बुक लेकर सुयोग्य वर ढूंढ रहे थे और पिछले ही हफ्ते उन्हें कामयाबी भी मिल गई थी। 'नहीं, नहीं। मैं तो AI वाले चित्रगुप्त की बात कर रहा हूं।' श्रीमान क ने कहा, तो मुझे माजरा समझ में आया। 'अच्छा, तो क्या-क्या कर सकती है आपकी AI?' मैंने बतकही बढ़ाने के लिए कहा। 'आप तो भाई साब, उससे किसी भी बीमारी का इलाज पूछ लो, कोई भी पढ़ाई कर लो, कहीं घूमने जाना हो, तो वहां की जानकारी ले लो। सब बता देती है, ए टु जेड।''वाह! पर मुझे नहीं लगता कि ये हमारे सारे काम कर देगी।' मैंने शक जताया, पर श्रीमान क ने पूरे भरोसे से कहा, 'भाई साब, आप बताइए, क्या काम है?' पार्क के कोने वाले ठेले से चाय के दो कप उठाने के बाद मैंने उन्हें बताना शुरू किया। 'काम तो ऐसा है कि वह जो प्लॉट पड़ा है पड़ोसी का, उसे अपने नाम कराना है। फिर मास्टर प्लान भले ही 4 मंजिल का हो, मुझे उस पर 6-7 मंजिल की बिल्डिंग खींचनी है। पीजी की बड़ी डिमांड है आजकल। 25-30 दड़बे बन जाएं, तो किराये से बढ़िया कमाई होगी, बुढ़ापा मस्ती में काटने का जुगाड़ हो जाएगा। आप AI से पूछकर बताओ, किसकी चरण वंदना करनी होगी, कितना पत्रम-पुष्पम लगेगा और साथ में AI भी चलेगी क्या?'