बोझ न बढ़े

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new rule on upi mdr to be levied on transactions above rs 2000 what will be the impact on the common man
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने इसी साल अप्रैल में 10 बरस पूरे किए। एक दशक में इसने लोगों तक पहुंच और लेनदेन, दोनों में जबरदस्त गति दिखाई है। 2016-17 में महज दो करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी कुल वैल्यू सात हजार करोड़ रुपये थी। 2025-26 में यही आंकड़ा 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन और 314 लाख करोड़ रुपये का रहा। ये डेटा बताते हैं कि UPI भारतीय अर्थव्यवस्था का जरूरी डिजिटल ढांचा बन चुका है। ऐसे में UPI लेनदेन को लेकर लिए गए फैसले बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

असर का आकलन । 15 अक्टूबर से दो हजार रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगेगा। सरकार ने दो हजार रुपये तक के UPI लेनदेन को किसी भी तरह के चार्ज से मुक्त रखा है। इसके पीछे सोच यह है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों पर कोई असर न पड़े। पिछले वित्तीय वर्ष में ग्राहकों से व्यापारियों को हुए करीब 96% भुगतान इसी सीमा में थे। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि संख्या भले कम हो, पर दो हजार रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन की वैल्यू दो तिहाई रही। यानी, शुल्क के दायरे में भले कम ट्रांजैक्शन आएं, पर असर व्यापक हो सकता है।
लागत की चिंता । सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि UPI के सिस्टम को टिकाऊ बनाया जा सके। किसी भी व्यवस्था को चलाने की लागत होती है और UPI के मामले में यह हर साल औसतन 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है। ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ने के साथ खर्च भी बढ़ रहा है और फिलहाल बैंक, सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां और सरकार मिल-जुलकर इसका बोझ उठा रहे हैं। लेकिन, यह व्यवस्था शायद लंबे वक्त तक न चल पाती।

UPI की ताकत । सरकार आम लोगों को सहूलियत देने और सिस्टम टिकाऊ बनाने में बैलेंस रखना चाहती है। हालांकि इन फैसलों से जुड़ी चिंताओं को समझते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि MDR का बोझ आम लोगों पर न पड़े। देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन की सबसे बड़ी ताकत ही रही है इसकी सरलता और मुफ्त होना। इसी वजह से उसने दूर-दराज के उन इलाकों तक पहुंच बना ली, जहां तक भी इंटरनेट है।

सहजता बनी रहे । अगर आम उपभोक्ताओं पर थोड़ा भी असर पड़ा, तो UPI की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। डिजिटल इंडिया की तरफ UPI एक बड़ी छलांग है। आज कई और देश इसे अपना रहे हैं। इसने भुगतान प्रणाली को बेहद सरल कर व्यापार को भी बढ़ाने में मदद की है। ऐसे में इसे सहज बनाए रखना होगा।