Devastating Landslide In Nepal A Double Blow Of Climate Change And Earthquake
त्रासदी के संकेत
Contributed by: दिलीप लाल|नवभारतटाइम्स.कॉम•
26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में चट्टान, बर्फ, मिट्टी और पानी का विशाल मलबा तेजी से नीचे आया। मलबे की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे से अधिक रही। उपग्रह तस्वीरों से पता चला है कि करीब 2.2 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला चट्टान का एक हिस्सा बर्फ के साथ टूटकर नीचे गिरा। इसमें करीब 11 करोड़ घन मीटर चट्टान और बर्फ शामिल थी- गीजा के पिरामिड के आयतन से लगभग 40 गुना। इस घटना के पीछे कई कारण हो सकते हैं। 2015 के 7.8 तीव्रता वाले गोरखा भूकंप ने पर्वत की चट्टानों को कमजोर किया होगा। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान बढ़ने से चट्टानों को जोड़कर रखने वाली पर्माफ्रॉस्ट बर्फ कमजोर हो रही है। 24-25 अगस्त को उस ऊंचाई पर औसत तापमान करीब 5 डिग्री सेल्सियस था, जबकि सामान्य औसत 2.7 डिग्री के आसपास रहता है। 2010 से 2026 के बीच संबंधित ग्लेशियर 300 मीटर से अधिक पीछे हट चुका है। ऐसी घटनाओं का खतरा केवल नेपाल तक सीमित नहीं। हिमालय, एंडीज और यूरोपीय आल्प्स जैसे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर और पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से चट्टानी हिमस्खलन और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ रहा है। दुनिया में करीब 1.5 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां ग्लेशियल झील बाढ़ का खतरा है। (NBT)