वैश्विक कूटनीति का नया केंद्र बना भारत

Contributed byअनिल बलूनी|नवभारतटाइम्स.कॉम
india becomes new center of global diplomacy historic success of brics summit 2026
नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS सम्मेलन के पहले ही दिन जब ‘ नई दिल्ली डिक्लेरेशन ’ की घोषणा हुई, तो वह केवल एक औपचारिक कूटनीतिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि 21वीं सदी की बदलती विश्व व्यवस्था का नया घोषणा पत्र था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी, सशक्त और निर्णायक नेतृत्व में संपन्न हुआ ‘BRICS सम्मेलन 2026’ भारतीय कूटनीति के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो चुका है। G-20 की अभूतपूर्व सफलता के बाद दुनिया यह देखने के लिए उत्सुक थी कि विभिन्न विचारधाराओं, भौगोलिक सीमाओं और अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताओं वाले BRICS देशों के बीच सामंजस्य कैसे हो पाएगा। भारत ने सम्मेलन के पहले ही दिन सर्वसम्मति से साझा घोषणापत्र पारित कराकर इन सभी संशयों को पूरी तरह निर्मूल कर दिया। साथ ही, यह भी स्थापित किया कि आज का भारत वैश्विक विमर्श को दिशा देने वाला सशक्त केंद्र बन चुका है।

ग्लोबल साउथ की आवाज
आज BRICS सिर्फ पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अनौपचारिक समूह नहीं रह गया है, विस्तारित स्वरूप में यह वैश्विक आर्थिक संतुलन को निर्णायक मोड़ देने वाली महाशक्ति बन चुका है। तथ्य इस जमीनी हकीकत को पूरी स्पष्टता से प्रमाणित करते हैं। आज का BRICS दुनिया की करीब 46% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे पृथ्वी का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय मंच बनाता है। यदि क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर देखें, तो वैश्विक GDP में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 36% से अधिक है। इसने G-7 के पारंपरिक आर्थिक दबदबे को पीछे छोड़ दिया है। इतना ही नहीं, विश्व के कुल कच्चे तेल उत्पादन और सिद्ध तेल भंडारों के 40% से अधिक हिस्से पर इस समूह का प्रभाव है। पीएम मोदी ने इस विशाल आर्थिक सामर्थ्य को टकराव का जरिया नहीं बनने दिया, बल्कि इसे एक न्यायसंगत, पारदर्शी और नियम-आधारित वित्तीय प्रणाली के निर्माण का आधार बनाया।

सामान्यतः बहुपक्षीय मंचों पर सदस्य देशों के अपने-अपने भू-राजनीतिक हितों और क्षेत्रीय विवादों के कारण संयुक्त घोषणा पत्र अंतिम क्षणों तक अधर में रहते हैं। इसके विपरीत, भारत ने पहले ही दिन सर्वसम्मति बनाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस घोषणा पत्र में भारत की प्राथमिकताओं को केंद्र में जगह मिली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी पुरानी वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग को एक स्वर से उठाया गया। सीमा पार व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को गति देकर वित्तीय जोखिमों को कम करने और ‘BRICS Pay’ जैसे व्यावहारिक तंत्र को मजबूत करने पर व्यापक सहमति बनी। साथ ही, भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और UPI को विकासशील दुनिया में वित्तीय समावेशन के सबसे विश्वसनीय साधन के रूप में मान्यता दी गई।

इस ऐतिहासिक आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि BRICS आज ‘ग्लोबल साउथ’ की सबसे प्रामाणिक और निर्भीक आवाज बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस विचार को आगे बढ़ाया है कि विकास का अधिकार केवल कुछ चुनिंदा संपन्न देशों तक सीमित नहीं रह सकता। चाहे जलवायु वित्त का जटिल सवाल हो, रियायती दरों पर तकनीक का हस्तांतरण हो या खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा का संरक्षण- भारत ने विकासशील और कम विकसित देशों के वास्तविक सरोकारों को अंतरराष्ट्रीय अजेंडे के केंद्र में ला खड़ा किया। आतंकवाद के विरुद्ध बिना किसी दोहरे मापदंड के साझा रणनीति बनाने के भारत के कड़े रुख का समर्थन कर सदस्य देशों ने यह दर्शाया कि सुरक्षा और संप्रभुता के सवालों पर अब कोई समझौता नहीं होगा।

भारत की सराहना

भारत की इस कूटनीतिक सफलता पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों और वैश्विक मीडिया ने भी खुलकर मुहर लगाई है। ब्रूकिंग्स और कार्नेगी एंडोमेंट जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक्स के रणनीतिकारों ने लिखा कि आज की विभाजित दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसी शक्ति है जो पश्चिमी देशों और उभरती शक्तियों के बीच एक निष्पक्ष, व्यावहारिक और भरोसेमंद सेतु का काम कर सकती है। वैश्विक वित्तीय पत्रिकाओं ने इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया कि विस्तारित BRICS के विभिन्न अंतर्विरोधों के बावजूद पीएम मोदी ने इस समूह को किसी पश्चिम विरोधी गुट में बदलने से रोका और इसे एक रचनात्मक, सुधारवादी आर्थिक मंच के रूप में दिशा दी। दुनिया भर के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह संतुलन केवल भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और प्रधानमंत्री के अंतरराष्ट्रीय कद के कारण ही संभव हो सका।

इस सम्मेलन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय पहलू जटिल द्विपक्षीय समीकरणों के बीच भारत द्वारा बनाया गया सकारात्मक माहौल रहा। सम्मेलन के सफल समापन के बाद चीनी विदेश मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने भारत की अध्यक्षता की खुलकर सराहना की। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS सम्मेलन ने एकजुटता, आपसी विश्वास और व्यावहारिक सहयोग को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने रेखांकित किया कि नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर बनी त्वरित सहमति यह सिद्ध करती है कि ब्रिक्स देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और वैश्विक विकास के साझा अजेंडे पर पूरी तरह एकजुट हैं और भारत द्वारा प्रदर्शित उत्कृष्ट नेतृत्व व समन्वय का चीन स्वागत करता है। तनावपूर्ण क्षेत्रीय संदर्भों के बावजूद इस प्रकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आना भारत के कूटनीतिक कौशल की परिपक्वता को दर्शाता है।

विकास और विरासत

नीतिगत और रणनीतिक सफलताओं के समानांतर प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति के सामर्थ्य को जिस आत्मीयता से वैश्विक पटल पर प्रस्तुत किया, उसने इस सम्मेलन को अविस्मरणीय बना दिया। भारत मंडपम में केवल कूटनीतिक मंथन नहीं हुआ, बल्कि विश्व नेताओं ने भारत की उस समृद्ध विविधता का साक्षात अनुभव किया जो हमारी असली शक्ति है। तमिलनाडु के भव्य और ऐतिहासिक मंदिर कॉरिडोर की स्थापत्य कला से लेकर मध्य प्रदेश की पारंपरिक शिल्पकला तक, और गुजरात की उद्यमशीलता के जीवंत रंगों से लेकर बिहार की मिट्टी से जुड़े सत्तू व पारंपरिक कृषि उत्पादों के स्वाद तक- विश्व के राष्ट्राध्यक्षों ने भारत की आत्मा को गहराई से महसूस किया।

‘विकास भी और विरासत भी’ का यह विजन आधुनिक भारत की सबसे सशक्त सॉफ्ट पावर बनकर दुनिया के सामने आया। इस बार का BRICS सम्मेलन इस बात की घोषणा है कि 21वीं सदी का नया भू-राजनीतिक शक्ति-संतुलन भारत के बिना तय नहीं हो सकता। पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने यह सिद्ध कर दिया है कि आज का भारत विरोधों को संवाद में बदलने, अनिश्चितताओं के बीच सर्वसम्मति गढ़ने और दुनिया को शांति व समृद्धि का नया मार्ग दिखाने में पूरी तरह सक्षम है। 140 करोड़ भारतीयों के बढ़ते आत्मविश्वास और भारत के संकल्प की यह जीत विश्व इतिहास में एक युगान्तकारी मोड़ के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

(लेखक लोकसभा सांसद और BJP के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं)