Smuggling Of Exotic Animals Rich Peoples Hobbies And Smugglers Black Business
अनोखा होने की सज़ा
नवभारतटाइम्स.कॉम•
कुछ समय पहले एक वेबसीरीज़ आई थी तस्करी, जिसमें दिखाया था कि हीरे जवाहरात ही नहीं, कई तरह के विदेशी सामान और जानवरों को कैसे और कहां-कहां छुपाकर लाया जाता है। एक सीन में मुंबई एयरपोर्ट की कस्टम टीम बैंकॉक से आए शख्स की चेकिंग करती है तो उसके कोट की जेब से पिग्मी मर्मोसेट (दुनिया का सबसे छोटा बंदर) निकलता है। आपकी हथेली पर आ जाने वाले इस बंदर का वजन मात्र 100 ग्राम के करीब होता है और लंबाई 5 से 6 इंच। इनका घर दक्षिण अमेरिका में अमेज़न बेसिन के वर्षावन हैं। लेकिन अमीरों के शौक के कारण अब ये उनके घरों में भी पाए जाने लगे हैं। पिछले कुछ समय से संपन्न वर्ग में इस तरह के विचित्र और दुर्लभ जीवों को पालने का चलन काफी बढ़ा है। ये वर्ग अपनी महंगी घड़ियों और बैग के साथ ही अवैध तरीके से खरीदे गए वूली मंकी, लेमर, पाइथन, इगुआना, अफ्रीकी ग्रे तोते, ब्लू गोल्ड मकाऊ का भी शोऑफ करते हैं। पिछले महीने एक्टर विक्रम ने दक्षिण पूर्व एशिया के द्वीपों में पाए जाने वाले वानर परिवार के सदस्य लार गिब्बन के साथ अपनी फोटो पोस्ट की तो काफी बवाल मचा। वन्यजीव प्रेमियों की आपत्ति के बाद एक्टर को पोस्ट डिलीट कर सफाई देनी पड़ गई।
लेकिन सबसे ज्यादा अचरज हुआ हाल ही में बालासोर के जंगल में अनाथ हाल में मिले पांच नन्हें ओरंगुटान को देखकर। इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों में रहने वाले जीव यहां कैसे पहुंचे, फिलहाल यह पहेली बना हुआ है। इनके मासूम चेहरे देख जितना लाड़ आ रहा था, उतना ही दुख इस हाल में पाए जाने पर हुआ। अंधेरे बक्सों में कैद होकर ये कितना कष्ट झेल यहां तक पहुंचे होंगे। ओरंगुटान के बच्चे इंसानों की तरह लंबे समय तक मां की देखभाल में रहते हैं। इनकी मां से छीनकर कैसे इन्हें अलग किया गया होगा।इस काले कारोबार का दुखद पहलू यह है कि इसका सबसे अधिक शिकार सरीसृप और पक्षियों की प्रजातियां हो रही हैं, पर सर्प में इन ओरंगुटान की तरह मासूमियत वाला फैक्टर नहीं होता तो किसी का ध्यान ही नहीं जाता। यूएन पर्यावरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2020 के बीच देश के 18 एयरपोर्ट से करीब 70 हज़ार अनोखे जीवों की तस्करी पकड़ी गई, जिनमें सांपों और पक्षियों की संख्या सर्वाधिक थी। पर उन्हें देख किसी को भी उस तरह से तरस नहीं आया जैसा ओरंगुटान के बच्चों को देखकर आया। इसी की बड़ी कीमतए भी वे चुका रहे हैं। नंदनकानन ज़ू में पल रहे ओरंगुटान के बच्चे तो शायद एक दिन अपने घर लौट जाएं पर बाकियों का जीवन रईसों और तस्करों के तंग पिंजरों में गुज़र जाएगा।