केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश यादव के पीडीए पर तंज, सपा को बताया परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी
केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश यादव के पीडीए पर तंज, सपा को बताया परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी
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लखनऊ, 5 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'पीडीए' (PDA) की नई परिभाषा पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने पीडीए को एक ऐसी पहेली बना दिया है जो गिरगिट की तरह हर पल रंग बदलती है। मौर्य ने आरोप लगाया कि सपा का पीडीए असल में 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है, जिसका केंद्र सिर्फ सैफई है। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव चाहे जितनी बार पीडीए की परिभाषा बदल लें, उन्हें 2027 और 2047 तक सत्ता से दूर ही रहना पड़ेगा। मौर्य ने सपा को 'लठैतवादी' बताते हुए कहा कि यह पार्टी पिछड़ों और ब्राह्मणों की नहीं, बल्कि गुंडों, अपराधियों, माफियाओं, दंगाइयों और भ्रष्टाचारियों की पार्टी है। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर चढ़ावे का विरोध करने पर कहा कि विपक्ष लगातार भगवान राम और हिंदुओं का अपमान कर रहा है। संभल हिंसा की रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट दंगों की आड़ में हिंदुओं की हत्या और कांग्रेस व सपा द्वारा दंगाइयों को बचाने का सच उजागर करेगी। मौर्य ने विधानसभा में सपा के आचरण की निंदा करते हुए कहा कि वे गुंडागर्दी, अपराध, माफिया, दंगे और भ्रष्टाचार से जुड़े हैं और आतंकवादियों के खिलाफ मामले वापस लिए थे। उन्होंने ईश्वर से सपा नेताओं को सद्बुद्धि देने या जनता द्वारा उन्हें विधायी सदन से दूर रखने की प्रार्थना की।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के पीडीए (PDA) पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह पीडीए कभी 'पिछड़ा', कभी 'पीड़ित' तो कभी 'पंडित' बन जाता है। उन्होंने कटाक्ष किया कि यह पीडीए असल में 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है, जिसका पूरा कारोबार सैफई तक सीमित है। मौर्य ने साफ कहा कि अखिलेश यादव चाहे जितनी बार पीडीए की परिभाषा बदल लें, उन्हें कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2027 तो छोड़ ही दीजिए, 2047 तक भी सपा सत्ता से कोसों दूर रहेगी। मौर्य ने सपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि नकाब के पीछे छिपी 'लठैतवादी' सपा असल में पिछड़ों और ब्राह्मणों की पार्टी नहीं है। यह तो गुंडों, अपराधियों, माफियाओं, दंगाइयों और भ्रष्टाचारियों की पार्टी है। उन्होंने कहा कि रोजाना बयान बदलकर जनता को गुमराह करने की राजनीति अब नहीं चलेगी। मौर्य ने विश्वास जताया कि 2027 से 2047 तक ब्राह्मण, पिछड़ा और दलित समाज सपा के झूठे नारों के सहारे नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और विकास की राजनीति के साथ खड़ा होगा।राहुल गांधी और अखिलेश यादव द्वारा संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने पर केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार भगवान राम और हिंदुओं का अपमान करता रहा है और अब तो साधुओं का भी अपमान कर रहा है। मौर्य ने जनता को आगाह किया कि जो लोग पहले राम मंदिर निर्माण का विरोध कर रहे थे, वे अब सिर्फ जनता को फिर से ठगने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब जानती है और ऐसे लोगों के बहकावे में नहीं आएगी।
विधानसभा में पेश की गई संभल हिंसा की रिपोर्ट पर बोलते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह रिपोर्ट जनता के सामने आएगी और सच्चाई को उजागर करेगी। उन्होंने बताया कि कैसे दंगों की आड़ में हिंदुओं की हत्याएं की गईं और कैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने दंगाइयों को बचाने का काम किया। मौर्य ने विधानसभा में समाजवादी पार्टी के आचरण को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि सदन में हंगामा करने की कोशिश करने वाले ये लोग गुंडागर्दी, अपराध, माफिया, दंगे और भ्रष्टाचार से जुड़े हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इन्हीं लोगों ने आतंकवादियों के खिलाफ मामले वापस लिए थे। मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान सपा सदस्यों द्वारा किए गए शर्मनाक व्यवहार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सपा सदस्यों ने सदन की मर्यादा को तार-तार कर दिया। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि या तो सपा नेताओं को सद्बुद्धि मिले या फिर जनता यह सुनिश्चित करे कि वे फिर कभी किसी विधायी सदन में कदम न रख पाएं।
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पूरा राज्य और सभी मीडियाकर्मी यह सब देख रहे थे। उन्होंने कहा कि सबने देखा कि चर्चा से कौन भाग रहा था। खन्ना ने सपा के प्लेकार्ड लेकर आने पर सवाल उठाया और कहा कि इससे साफ पता चलता है कि वे चर्चा नहीं करना चाहते और सिर्फ दिखावा करना चाहते हैं। उन्होंने पूछा कि आज प्लेकार्ड लाने का मकसद क्या था।
समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण सम्मेलन पर सुरेश खन्ना ने कहा कि सपा की यह आदत है कि जो कुछ भी उनके सामने होता है, उसे वह अपना बता देते हैं। उन्होंने कहा कि पहले वे इसे पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक कहते थे, और अब इसमें 'पंडित' जोड़ दिया है। खन्ना ने इसे दोहरेपन के अलावा कुछ नहीं बताया और कहा कि उनकी सोच नकारात्मक है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच का नतीजा विपक्ष में बैठना होता है, जबकि हम लोग सकारात्मक सोच रखते हैं और इसीलिए सत्ता में हैं।