उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी, आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट
उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी, आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट
NewsPoint•
देहरादून, 5 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के चलते राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए मंगलवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि बाकी 10 जिलों में येलो अलर्ट है। बुधवार, 6 अगस्त के लिए देहरादून, चमोली और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट और अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मंगलवार सुबह से ही देहरादून, मसूरी, विकासनगर, ऋषिकेश, उत्तरकाशी और टिहरी के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है। रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई है। शाम के बाद मौसम में बदलाव आने की उम्मीद है और मैदानी इलाकों में बन रहे बादल पहाड़ी इलाकों की ओर बढ़ेंगे, जिससे रात में इन क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले इलाकों, निचले इलाकों और ऐसी जगहों से दूर रहें जहाँ अचानक पानी का बहाव बढ़ सकता है। अगर कहीं बाढ़ या तेज बहाव का खतरा हो तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। साथ ही, खराब मौसम में बेवजह यात्रा करने से बचें ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके। उन्होंने नागरिकों से भारत सरकार के 'सचेत' ऐप को डाउनलोड करने का आग्रह किया है, जो मौसम अलर्ट, आपदा से बचाव के उपाय और जरूरी दिशा-निर्देश प्रदान करता है। यह ऐप देश में कहीं भी रहने या यात्रा करने के दौरान मौसम की चेतावनियां देता है।
विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य और जिला स्तर पर सभी कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहे हैं और विभिन्न एजेंसियों के बीच लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है। विभाग लोगों से लगातार सतर्क रहने की अपील करता है। जहां भारी बारिश की आशंका होती है, वहां भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) से अलर्ट मिलने के बाद एसएमएस के जरिए लोगों को सूचना भेजी जाती है। अगर किसी इलाके में बहुत गंभीर स्थिति बनने की आशंका होती है, तो सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक से भी तुरंत चेतावनी दी जाती है। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का अच्छा असर दिख रहा है और लोग समय पर सतर्क होकर जरूरी सावधानियां बरत रहे हैं। भूस्खलन संभावित इलाकों और नदी किनारे बसे इलाकों पर भी विभाग की खास नजर है।अधिकारी ने बताया कि नदी का जलस्तर मुख्य रूप से दो वजहों से बढ़ता है: एक तो कैचमेंट एरिया (जहाँ से नदी का पानी आता है) में भारी बारिश और दूसरा, ऊपरी इलाकों में बने बांधों से पानी छोड़ा जाना। दोनों ही स्थितियों में विभाग को पहले से जानकारी मिल जाती है। विभाग के पास यह पूरी जानकारी है कि किस जलस्तर पर कौन-कौन से इलाके प्रभावित हो सकते हैं। इसी जानकारी के आधार पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष, बाढ़ चौकियों और जिला प्रशासन के जरिए सायरन, मुनादी और दूसरे संचार माध्यमों से लोगों को समय रहते सतर्क किया जाता है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर भी पहुंचाया जाता है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने यह भी साफ किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार सभी अधिकारी पूरी तरह से अलर्ट मोड में हैं। जहां भी कोई आपदा या खतरे की स्थिति बनती है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों, जिलाधिकारियों और जिला प्रशासन के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेने और राहत व बचाव कार्य तेजी से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि प्रशासन का मुख्य लक्ष्य किसी भी संभावित आपदा के असर को कम से कम रखना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनियों को गंभीरता से लें। खासकर ऑरेंज और रेड अलर्ट वाले इलाकों में विशेष सावधानी बरतें। जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचें और अगर आप नदी के किनारे या निचले इलाकों में रहते हैं, तो किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
विभाग ने यह भी बताया कि भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में यात्रा करने से बचें। अगर यात्रा करना बहुत जरूरी हो, तो स्थानीय प्रशासन से संपर्क करके वहां की स्थिति की जानकारी जरूर लें। पहाड़ी इलाकों में सड़कें बंद हो सकती हैं, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है।
'सचेत' ऐप के बारे में बताते हुए विभाग ने कहा कि यह ऐप सिर्फ अलर्ट ही नहीं देता, बल्कि आपदा के समय क्या करना चाहिए, इसके बारे में भी जानकारी देता है। यह ऐप डाउनलोड करना बहुत आसान है और यह आपके मोबाइल पर हमेशा उपलब्ध रहेगा। यह ऐप आपको किसी भी तरह की आपदा से बचने में मदद कर सकता है।
नदी के जलस्तर बढ़ने के बारे में विभाग ने विस्तार से बताया कि जब कैचमेंट एरिया में बहुत ज्यादा बारिश होती है, तो नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता है। इसी तरह, अगर बांधों से एक साथ बहुत सारा पानी छोड़ा जाता है, तो भी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विभाग इन दोनों स्थितियों पर लगातार नजर रखता है और जैसे ही खतरे का अंदेशा होता है, वह तुरंत लोगों को सूचित करता है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की मैपिंग कर चुके हैं। इसका मतलब है कि उन्हें पता है कि कौन से इलाके भूस्खलन की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। उनके पास पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित टीमें हैं। वे लगातार विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए, सभी अधिकारी पूरी तरह से सक्रिय हैं। अगर कहीं भी कोई समस्या आती है, तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचकर स्थिति को संभालेंगे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लोगों की जान-माल की सुरक्षा करना है।
विभाग ने यह भी कहा कि वे लोगों से मिली प्रतिक्रिया पर भी ध्यान देते हैं। अगर लोगों को किसी भी तरह की परेशानी होती है या उन्हें कोई सुझाव देना होता है, तो वे कंट्रोल रूम में संपर्क कर सकते हैं।
अंत में, विभाग ने एक बार फिर सभी से अपील की है कि वे सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करें। आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।