दक्षिण अफ्रीका बना साइबर अपराधियों का बड़ा निशाना, इंटरपोल रिपोर्ट का खुलासा
दक्षिण अफ्रीका बना साइबर अपराधियों का बड़ा निशाना, इंटरपोल रिपोर्ट का खुलासा
NewsPoint•
केप टाउन, 5 अगस्त: दक्षिणी अफ्रीका साइबर अपराधियों का नया अड्डा बन गया है। इंटरपोल की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, पूरे महाद्वीप में होने वाले रैंसमवेयर, फ़िशिंग और बिजनेस ईमेल धोखाधड़ी के अधिकांश मामले यहीं सामने आ रहे हैं। यह रिपोर्ट 36 अफ्रीकी देशों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है और इसमें दक्षिणी अफ्रीका को 'महाद्वीप का सबसे डिजिटल रूप से विकसित और सबसे ज्यादा निशाना बनाया जाने वाला क्षेत्र' बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि अफ्रीका में साइबर अपराध से होने वाला आर्थिक नुकसान 2024 के बाद से दोगुना से भी ज्यादा बढ़कर 48.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
इंटरपोल की 40 पन्नों की 'अफ्रीकन साइबरथ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट 2026' ने इस चिंताजनक तस्वीर को सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैंसमवेयर हमलों के कुल मामलों में से 92 प्रतिशत अकेले दक्षिण अफ्रीका में पाए गए। रैंसमवेयर एक तरह का साइबर हमला है जिसमें अपराधियों द्वारा आपके कंप्यूटर या डेटा को लॉक कर दिया जाता है और उसे वापस पाने के लिए फिरौती मांगी जाती है। इसके अलावा, देश में 2,13,523 डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले दर्ज किए गए। DDoS हमले में, अपराधी किसी वेबसाइट या ऑनलाइन सेवा को भारी मात्रा में नकली ट्रैफिक भेजकर उसे ठप कर देते हैं। इनमें से एक हमले की गति तो 312 गीगाबिट प्रति सेकंड तक पहुंच गई थी, जो कि बहुत तेज गति है।साइबर सुरक्षा कंपनी 'SOCradar' के आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका में होने वाले कुल फ़िशिंग मामलों में से लगभग 40 प्रतिशत दक्षिण अफ्रीका में हुए। फ़िशिंग एक ऐसी तरकीब है जिसमें अपराधी आपको नकली ईमेल या संदेश भेजकर आपकी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे पासवर्ड या बैंक डिटेल, हासिल करने की कोशिश करते हैं। 'TrendAI' के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (BEC) के 70 प्रतिशत मामले भी दक्षिण अफ्रीका से जुड़े थे। BEC में, अपराधी किसी कंपनी के ईमेल सिस्टम में घुसपैठ करके कर्मचारियों को धोखा देते हैं और पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अफ्रीका में साइबर अपराध अब छोटे-मोटे अपराधों तक सीमित नहीं है। यह एक 'संगठित और सीमाओं से परे फैला हुआ नेटवर्क' बन चुका है। इस नेटवर्क को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन जैसी नई तकनीकों का बढ़ता इस्तेमाल और ताकत दे रहा है। AI का मतलब है मशीनों द्वारा इंसानों की तरह सोचना और काम करना।
2025 में, ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी अफ्रीका में सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाने वाले साइबर अपराध रहे। अपराधी लोगों को निशाना बनाने के लिए मोबाइल मनी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 72 प्रतिशत अफ्रीकी देशों ने बताया कि उनके यहां ऑनलाइन ठगी से जुड़े संगठित स्कैम सेंटर मौजूद हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दक्षिणी और पश्चिमी अफ्रीका में पाई गई।
इंटरपोल की साइबर अपराध इकाई के निदेशक नील जेटन ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, "साइबर अपराध इस क्षेत्र के लिए सबसे गंभीर आपराधिक खतरों में से एक बन चुका है।" उन्होंने आगे कहा, "एआई साइबर हमले के हर चरण को ऑटोमेट कर रहा है, चाहे वह जानकारी जुटाना हो, फिशिंग करना हो, पैसे की वसूली करना हो या सुरक्षा से बच निकलना हो।" इसका मतलब है कि AI साइबर अपराधियों के काम को बहुत आसान बना रहा है, जिससे वे तेजी से और ज्यादा प्रभावी ढंग से हमले कर पा रहे हैं।
हालांकि, नील जेटन ने यह भी उम्मीद जताई कि जब देश मिलकर काम करते हैं, तो साइबर अपराधियों के नेटवर्क की पहचान की जा सकती है, उन्हें बाधित किया जा सकता है और पूरी तरह खत्म भी किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भले ही दक्षिणी अफ्रीका के देशों के पास महाद्वीप की कुछ सबसे मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्थाएं हैं, फिर भी AI की मदद से होने वाले तेज और बड़े साइबर हमलों के सामने वे अभी भी काफी हद तक असुरक्षित बने हुए हैं। यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि अपराधी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।