दीपक प्रकाश बिहार विधान परिषद के मनोनीत सदस्य बने, मंत्री पद का विवाद समाप्त

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Navbharat Times
बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद अब खत्म हो गया है। राज्यपाल ने बुधवार को बिहार सरकार की सिफारिश को मंजूरी देते हुए दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का मनोनीत सदस्य बना दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी सदन का सदस्य हुए मंत्री बने रहने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था। बिहार सरकार द्वारा जारी असाधारण बिहार गजट के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्यपाल ने बिहार विधान परिषद की खाली मनोनीत सीट पर दीपक प्रकाश को सदस्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति पांच अगस्त से प्रभावी मानी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख और एनडीए नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना कोई नया फैसला नहीं है। यह एनडीए का पहले से तय कार्यक्रम था, जिसे अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पूरा किया गया है। कुशवाहा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सभी नेताओं के बीच पहले ही यह तय हो गया था कि दीपक प्रकाश को सदन में भेजा जाएगा। जब उन्हें मंत्री बनाया गया था, उसी समय यह निर्णय लिया गया था। आज उसी फैसले को लागू किया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि इस निर्णय को हकीकत में बदलने के लिए वे Prime Minister Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, Chief Minister सम्राट चौधरी और एनडीए के सभी नेताओं के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए बिहार के विकास के लिए पूरी ताकत से काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था। विपक्षी दलों ने नैतिकता के आधार पर उनसे इस्तीफे की मांग भी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह कार्रवाई किसी को जवाब देने के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक औपचारिकता को पूरा करने के लिए की गई है। राजनीतिक स्तर पर यह फैसला पहले ही ले लिया गया था। उन्होंने कहा, “सवाल उठाने वाले हर बात पर सवाल उठाते हैं। अच्छा काम होगा तब भी सवाल उठाएंगे और कहीं कमी रह जाएगी तो भी सवाल उठाएंगे। यह फैसला विपक्ष के दबाव में नहीं, बल्कि पहले से तय Political निर्णय के अनुरूप लिया गया है।”

विपक्ष पर पलटवार करते हुए कुशवाहा ने कहा कि जो लोग नैतिकता की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने आचरण और व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो दल खुद नैतिक मूल्यों का पालन नहीं करते, उन्हें दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं और दीपक प्रकाश का विधान परिषद में मनोनयन एनडीए के पहले से तय निर्णय का हिस्सा है। इससे मंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस पर भी विराम लगने की पूरी संभावना है।

यह नियुक्ति बिहार के राजनीतिक गलियारों में काफी अहम मानी जा रही है। दीपक प्रकाश, जो पहले किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, अब विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके तहत राज्यपाल किसी भी क्षेत्र के विशेषज्ञ या ऐसे व्यक्ति को विधान परिषद में मनोनीत कर सकते हैं, जिन्हें वे महत्वपूर्ण समझते हैं। इस मामले में, सरकार ने दीपक प्रकाश को मंत्री पद पर बनाए रखने के लिए यह रास्ता चुना।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में, राज्यपाल द्वारा यह नियुक्ति करना सरकार के लिए एक राहत भरा कदम है। यह दर्शाता है कि सरकार ने कानूनी और संवैधानिक दायरे में रहकर इस मुद्दे का समाधान निकाला है।

उपेंद्र कुशवाहा के बयान से यह स्पष्ट होता है कि यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि एनडीए के भीतर पहले से ही इसकी योजना बनाई गई थी। यह एनडीए की एकजुटता और समन्वय को भी दर्शाता है। कुशवाहा ने जिस तरह से Prime Minister Narendra Modi और गृह मंत्री अमित शाह जैसे वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त किया है, उससे यह भी पता चलता है कि यह निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व के अनुमोदन से ही लिया गया है।

विपक्ष के सवालों पर कुशवाहा का जवाब काफी तीखा था। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि वे हर बात पर सवाल उठाते हैं, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। यह दर्शाता है कि एनडीए विपक्ष के सवालों से विचलित नहीं है और अपने फैसलों पर अडिग है। नैतिकता के मुद्दे पर विपक्ष को आईना दिखाते हुए कुशवाहा ने कहा कि जो खुद नैतिक नहीं हैं, वे दूसरों को क्या सिखाएंगे। यह बयान विपक्ष के लिए एक मजबूत संदेश है।

कुल मिलाकर, दीपक प्रकाश के मंत्री पद का मामला अब सुलझ गया है। राज्यपाल की नियुक्ति के बाद, दीपक प्रकाश अब विधिवत रूप से विधान परिषद के सदस्य हैं और मंत्री पद पर बने रह सकते हैं। यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और एनडीए के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।