हैती नागरिकों का टीपीएस समाप्त, अमेरिका में निर्वासन का खतरा
हैती नागरिकों का टीपीएस समाप्त, अमेरिका में निर्वासन का खतरा
NewsPoint•
वॉशिंगटन, 6 अगस्त: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को लगभग 3.5 लाख हैती नागरिकों का अस्थायी संरक्षित दर्जा (TPS) खत्म करने की इजाजत दे दी है। इस फैसले से इन प्रवासियों पर देश से निकाले जाने का खतरा मंडराने लगा है, जबकि हैती इस वक्त भुखमरी, हिंसा और अस्थिरता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। टीपीएस एक ऐसी व्यवस्था है जो उन देशों के नागरिकों को अमेरिका में कुछ समय के लिए रहने और काम करने की अनुमति देती है, जहाँ युद्ध, प्राकृतिक आपदा या कोई और बड़ी मुसीबत आई हो। यह दर्जा लोगों को देश से निकाले जाने से भी बचाता है।
डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया की जिला अदालत की जज एना सी. रेयेस ने पहले ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिससे हैती के नागरिकों की टीपीएस सुरक्षा खत्म होनी थी। बाद में एक संघीय अपीलीय अदालत ने भी इस रोक को जारी रखा था। लेकिन, जून में अमेरिकी Supreme Court ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि संघीय कानून के तहत टीपीएस से जुड़े फैसले कोर्ट में चुनौती नहीं दिए जा सकते। इस फैसले का असर हैती, सीरिया और ऐसे दूसरे देशों के नागरिकों पर पड़ सकता है जिन्हें अमेरिकी विदेश विभाग बहुत खतरनाक मानता है। Supreme Court के फैसले के बाद जज रेयेस ने बुधवार को अपना पुराना आदेश वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से उनकी 2 फरवरी 2026 तक की रोक अब मान्य नहीं है। इसके साथ ही हैती के नागरिकों की टीपीएस सुरक्षा खत्म करने पर लगी रोक भी हट गई।प्रवासी अधिकार संगठन एफडब्ल्यूडी.यूएस ने सरकारी आंकड़ों के आधार पर बताया कि टीपीएस का फायदा उठाने वाले करीब दो लाख हैती नागरिक अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या स्वास्थ्य सेवाओं, खाने-पीने की चीजों से जुड़े कामों, गोदामों, दुकानों और बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में काम करती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने हैती को अपने यात्रा परामर्श में लेवल-4 श्रेणी में रखा है, जो सबसे खतरनाक स्तर है। विभाग ने वहां अपराध, लोगों का अपहरण, आतंकवादी हमले, सामाजिक अशांति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
इस फैसले ने अमेरिका में रह रहे हजारों हैती नागरिकों के भविष्य को लेकर एक नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। अब उन्हें देश से निकाले जाने और अपनी कानूनी स्थिति को लेकर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। टीपीएस, यानी अस्थायी संरक्षित दर्जा, उन लोगों को अमेरिका में रहने की इजाजत देता है जिनके देश में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा या संघर्ष चल रहा हो। यह उन्हें काम करने और देश से निकाले जाने से सुरक्षा देता है।
ट्रंप प्रशासन ने 2018 में हैती के लिए टीपीएस को खत्म करने का फैसला किया था, लेकिन इसे कई बार टाला गया। इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिला जज एना सी. रेयेस ने पहले इस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसे अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इन सभी अदालती फैसलों को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टीपीएस से जुड़े फैसले पर कोर्ट का दखल नहीं हो सकता।
इस फैसले का मतलब है कि अब हैती के नागरिक अपना टीपीएस दर्जा खो सकते हैं और उन्हें अमेरिका से निकाला जा सकता है। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी चिंता की बात है जो सालों से अमेरिका में रह रहे हैं और यहीं काम कर रहे हैं। हैती खुद इस वक्त राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। ऐसे में अगर इन लोगों को वापस भेजा गया तो उनके लिए वहां रहना और भी मुश्किल हो जाएगा।
यह फैसला सिर्फ हैती के नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि सीरिया और अन्य देशों के नागरिकों के लिए भी चिंता का विषय है, जिनके टीपीएस को भी खत्म किया जा सकता है। यह अमेरिकी आव्रजन नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। प्रवासी अधिकार समूह इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और सरकार से पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि इन लोगों को अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए, खासकर जब उनके देश की स्थिति इतनी खराब है।