महाराष्ट्र में 15,407 संदिग्ध चिकित्सा दावों की जांच के लिए एसआईटी का गठन

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मुंबई, महाराष्ट्र सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के तहत 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के बाद लिया गया, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी का नेतृत्व नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम करेंगे और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक भी मदद करेंगे। यह कदम तब उठाया गया जब प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कथित अनियमितताएं कई जिलों में फैली हुई हैं, जिससे एक स्वतंत्र एसआईटी द्वारा व्यापक जांच की आवश्यकता महसूस हुई। एसआईटी अस्पतालों में फर्जी या अनावश्यक उपचार, उपचार श्रेणियों की गलत रिपोर्टिंग, पैनल में शामिल करने की प्रक्रियाओं में गड़बड़ी, संदिग्ध रोगी पंजीकरण, एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र पर कई दावे, और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, जिला समन्वयकों व अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच करेगी। साथ ही, यह दावा स्वीकृति प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और पैनल चयन प्रणाली में खामियों का अध्ययन कर भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुझाव भी देगी। एसआईटी को अपनी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपनी होगी, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

यह महत्वपूर्ण कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में बताया था कि महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज पूरी तरह से मुफ्त और कैशलेस है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मरीजों से 'एक रुपया भी अतिरिक्त' नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि कोई अस्पताल लाभार्थियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलते हुए पाया गया, तो उसे तुरंत योजना से बाहर कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ एफआईआर सहित आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। यह भी सामने आया कि कुछ निजी अस्पताल योजना के लाभार्थियों को बेड उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर इलाज से मना कर देते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड शुरू करने की घोषणा की है।
सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, एसआईटी का गठन नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में किया गया है। इस टीम में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यदि आवश्यकता पड़ी, तो चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक भी एसआईटी की सहायता करेंगे। यह निर्णय 10 जुलाई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद लिया गया।

इससे पहले, सरकार ने सिविल सर्जनों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे योजनाओं के लाभार्थियों के घर जाकर संदिग्ध दावों का सत्यापन करें। हालांकि, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि कथित अनियमितताएं सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई जिलों में फैली हुई हैं। इसी वजह से राज्य सरकार ने एक स्वतंत्र एसआईटी के माध्यम से इस मामले की व्यापक जांच कराने का फैसला किया।

एसआईटी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि क्या अस्पतालों ने फर्जी या चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक उपचार के दावे किए हैं। क्या उपचार की श्रेणियों को जानबूझकर उच्च स्तर पर दिखाया गया है, जिसे 'अपकोडिंग' कहते हैं। अस्पतालों को पैनल में शामिल करने और उनके नवीनीकरण की प्रक्रियाओं में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं। क्या मरीजों का पंजीकरण संदिग्ध तरीके से हुआ है। क्या एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र का उपयोग करके कई दावे किए गए हैं। साथ ही, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, जिला समन्वयकों और अन्य संबंधित पक्षों की क्या भूमिका रही है, इसकी भी जांच की जाएगी।

इसके अलावा, एसआईटी को दावा स्वीकृति की प्रक्रिया में क्या कमियां हैं, निगरानी व्यवस्था कैसी है, और अस्पतालों के पैनल चयन प्रणाली में क्या खामियां हैं, इसका भी अध्ययन करना होगा। इन सभी का अध्ययन करके एसआईटी भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुधार संबंधी सुझाव भी देगी।

सरकारी आदेश के अनुसार, एसआईटी को अपनी जांच पूरी करने के बाद 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।

मानसून सत्र के दौरान, राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में इस बात पर जोर दिया था कि महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज पूरी तरह से मुफ्त और कैशलेस है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों से 'एक रुपया भी अतिरिक्त' नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्री आबिटकर ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि कोई अस्पताल लाभार्थियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलते हुए पाया गया, तो उसे तुरंत योजना से बाहर कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ एफआईआर सहित आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ निजी अस्पताल योजना के लाभार्थियों को बेड उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर इलाज से मना कर देते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड शुरू करने की घोषणा की है।