आदित्य ठाकरे ने Cm फडणवीस को लिखा पत्र, मुंबई की 16 एकड़ जमीन आवंटन का विरोध
आदित्य ठाकरे ने CM फडणवीस को लिखा पत्र, मुंबई की 16 एकड़ जमीन आवंटन का विरोध
NewsPoint•
मुंबई, 5 अगस्त। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर मुंबई की लगभग 16 एकड़ सार्वजनिक खुली जमीन एक संस्था को आवंटित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और म्हाडा के ज़रिए सार्वजनिक जमीनों का हस्तांतरण किया जा रहा है और उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रक्रिया में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मामले को उठाते हुए कहा, “मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर बीएमसी और म्हाडा के ज़रिए उनकी पार्टी द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को रोकने की मांग की है। मुंबई की 16 एकड़ खुली जगह एक भाजपा एमएलसी को सौंपी जा रही है। इनमें से दो भूखंड मुफ्त और एक बेहद कम कीमत पर दिया जा रहा है। यह बंद होना चाहिए। मुंबईकर इस शर्मनाक भूमि कब्जे के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।”अपने पत्र में, आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से अंधेरी (पश्चिम) और जुहू में स्थित तीन सार्वजनिक खुले भूखंडों के लिए श्री विले पार्ले केलवाणी मंडल (एसवीकेएम) को जारी की गई एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) और आवंटन को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि बीएमसी और म्हाडा एसवीकेएम को लगभग 16 एकड़ जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। यह जमीन फिलहाल आम नागरिकों द्वारा बगीचे, खेल के मैदान, मनोरंजन स्थलों और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण जगह के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है।
पत्र के अनुसार, इस प्रस्तावित आवंटन में तीन खास भूखंड शामिल हैं। ये भूखंड अंधेरी पश्चिम में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डीएन नगर में स्थित पूर्व म्हाडा सीमेंट गोदाम परिसर और जुहू में स्थित लोकमान्य तिलक उद्यान हैं। आदित्य ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि गुलमोहर एरिया सोसाइटीज वेलफेयर ग्रुप, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन भूखंडों को सार्वजनिक खुली जगह के रूप में सुरक्षित रखा जाए और आम लोगों की पहुंच हमेशा बनी रहे।
उन्होंने मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन किया कि इन तीनों भूखंडों से संबंधित एनओसी और आवंटन को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही, उन्होंने बीएमसी और म्हाडा जैसी संबंधित एजेंसियों को निर्देश देने का आग्रह किया कि इन जमीनों को सार्वजनिक हित में संरक्षित रखा जाए और नागरिकों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जाए। आदित्य ठाकरे का मानना है कि यह जमीन मुंबई के लोगों की है और इसे किसी निजी संस्था को सौंपना गलत है। उन्होंने कहा कि मुंबई के लोग इस तरह के भूमि कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ आवाज़ उठाएंगे। यह मामला मुंबई के भविष्य और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण से जुड़ा है, इसलिए इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।