दलाई लामा ने नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई मौतों पर दुख जताया, जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की

NewsPoint
Navbharat Times
धर्मशाला, 27 अगस्त (आईएएनएस)। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा इलाके और तिब्बत के कीरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई भारी जनहानि और तबाही पर गहरा दुख व्यक्त किया है। गुरुवार को जारी एक बयान में, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने कहा कि इस आपदा में कई लोगों की जान गई है और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई और भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की उम्मीद जताई। यह बाढ़ तिब्बती क्षेत्र से होते हुए भोटेकोशी नदी तक पहुंची और नेपाल में भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

दलाई लामा ने कहा, "नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में विनाशकारी बाढ़ के बारे में जानकर मुझे दुख हुआ है। इस आपदा की वजह से कई लोगों ने जान गंवाई और भारी संरचनात्मक क्षति हुई। मैं उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, और शोक संतप्त और इस त्रासदी पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति और हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस क्षेत्र में बार-बार आने वाली आपदाएं जलवायु परिवर्तन या अन्य गहरे अंतर्निहित कारणों का संकेत हो सकती हैं।
बुजुर्ग बौद्ध भिक्षु ने आगे कहा, "मुझे उम्मीद है कि जहां भी संभव हो, उचित अनुवर्ती (फॉलोअप) उपाय किए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी आपदाएं दोबारा न हों।" यह बाढ़ तिब्बती क्षेत्र से शुरू होकर सीमा पार भोटेकोशी नदी तक पहुंच गई, जिसने नेपाल में तबाही का मंजर छोड़ दिया।

नेपाल पुलिस ने गुरुवार सुबह तक भोटेकोशी फ्लैश फ्लड में बह गए 162 लोगों के शव बरामद करने की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहु, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी पश्चिम जैसे कई निचले जिलों में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के किनारे से शव और कुछ अंग मिले हैं। सबसे ज्यादा शव नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाके चितवन में मिले हैं।

नेपाल सरकार ने बताया है कि विदेशी नागरिकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। बुधवार देर शाम जारी एक बयान में, प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि नेपाल सेना के 44 जवान, विभिन्न पुलिस चौकियों पर तैनात नेपाल पुलिस के 28 जवान और आपदा ग्रस्त क्षेत्र में तैनात 13 सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के जवानों से संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा, 391 विदेशी पर्यटक और 93 नेपाली पर्यटक भी आपदा के बाद से संपर्क से बाहर हैं। अधिकारियों ने 133 भारतीयों के लापता होने की भी पुष्टि की है। यह बाढ़ एक गंभीर प्राकृतिक आपदा है जिसने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है।