ट्रंप ने लीन बीफ ट्रिमिंग्स पर कम शुल्क वाली व्यवस्था बढ़ाई, उपभोक्ताओं को राहत
ट्रंप ने लीन बीफ ट्रिमिंग्स पर कम शुल्क वाली व्यवस्था बढ़ाई, उपभोक्ताओं को राहत
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वॉशिंगटन, 27 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में मवेशियों की घटती संख्या और बढ़ती कीमतों को देखते हुए, लीन बीफ ट्रिमिंग्स के आयात पर कम शुल्क वाली व्यवस्था को तीन लाख मीट्रिक टन तक बढ़ा दिया है। यह कदम एक सितंबर से शुरू होने वाले 90 दिनों के लिए लागू होगा, जिसका मकसद ग्राउंड बीफ की आपूर्ति बढ़ाना और उपभोक्ताओं के लिए दाम कम करना है। इस अतिरिक्त आयात को 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा जाएगा, जिसमें हर हिस्से में एक लाख मीट्रिक टन बीफ शामिल होगा।
यह विशेष व्यवस्था केवल कम वसा वाले बीफ ट्रिमिंग्स पर लागू होगी, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी बीफ के साथ मिलाकर ग्राउंड बीफ बनाने में होता है। इससे उन देशों के साथ अमेरिका के मौजूदा व्यापारिक समझौतों या विशेष बीफ कोटे पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिनके साथ अमेरिका का मुक्त व्यापार समझौता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और बाजार में बड़े व्यवधानों के कारण घरेलू उत्पादन मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनकी जिम्मेदारी है कि मेहनतकश अमेरिकी अपने और अपने परिवार के लिए भोजन खरीद सकें और उसका खर्च उठा सकें।प्रशासन का अनुमान है कि इस अस्थायी कोटे से अमेरिका में बीफ की कुल आपूर्ति लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सरकार का मानना है कि यह आयात मुख्य रूप से बूढ़ी या उत्पादन से बाहर हो चुकी गायों के बाजार से प्रतिस्पर्धा करेगा और तैयार किए जाने वाले मवेशियों के बाजार पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। कृषि मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि विस्तारित कोटे के तहत आने वाला बीफ मौजूदा बाजार मूल्य से कम से कम 25 प्रतिशत सस्ता बेचा जा रहा है या नहीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया, "अगर इस फैसले के बाद आयातित ग्राउंड बीफ की कीमतें कम नहीं होतीं, तो मैं इस व्यवस्था को समाप्त कर सकता हूं, ताकि विदेशी उत्पादकों को अनुचित लाभ न मिले।"
व्हाइट हाउस ने बताया कि मैक्सिको से जीवित मवेशियों के आयात पर लगे प्रतिबंध भी अमेरिकी बीफ उत्पादन में कमी का एक कारण हैं। ये प्रतिबंध 'न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म' नामक एक कीट के फैलाव को रोकने के लिए लगाए गए थे। इसके अलावा, सूखे, जंगल की आग और पशुओं के चारे की कम उपलब्धता ने भी अमेरिका के प्रमुख पशुपालन क्षेत्रों में उत्पादन को प्रभावित किया है। प्रशासन के अनुसार, मैक्सिको से पशुओं की आवाजाही पर दक्षिणी सीमा के बंदरगाहों के बंद होने के कारण अमेरिका में लाखों टन बीफ उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, कुछ बंदरगाहों को सुरक्षा उपायों के साथ धीरे-धीरे फिर से खोला जा रहा है।
अमेरिकी कृषि विभाग का अनुमान है कि देश का घरेलू बीफ उत्पादन 2025 तक 2015 के स्तर की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत कम हो जाएगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि अमेरिकी मवेशी झुंड पिछले 75 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, हालांकि जुलाई के आंकड़ों के अनुसार इसमें थोड़ी बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। व्हाइट हाउस ने इसके लिए बाइडेन प्रशासन की नीतियों और महंगाई को जिम्मेदार ठहराया, जिनके कारण किसानों की लागत बढ़ गई। प्रशासन का कहना है कि अब पशुपालक अधिक संख्या में बछियों को अपने पास रख रहे हैं, जिससे 2018 के बाद पहली बार अमेरिका में कुल मवेशियों की संख्या बढ़नी शुरू हुई है।
इससे पहले, फरवरी में ट्रंप ने अर्जेंटीना से आने वाले कम वसा वाले बीफ ट्रिमिंग्स के 2026 के कोटे में 80,000 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की थी। बुधवार को जारी नए आदेश में उस कोटे में कोई बदलाव नहीं किया गया है, और अतिरिक्त तीन लाख मीट्रिक टन का कोटा अन्य पात्र देशों और क्षेत्रों को दिया गया है। यह फैसला उरुग्वे राउंड एग्रीमेंट्स एक्ट के तहत लिया गया है। यह कानून राष्ट्रपति को ऐसी परिस्थितियों में कृषि उत्पादों के आयात को अस्थायी रूप से बढ़ाने की अनुमति देता है, जब प्राकृतिक आपदा, बीमारी या बड़े बाजार संकट के कारण घरेलू आपूर्ति पर्याप्त न हो।
यह पूरा मामला अमेरिका में बीफ की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चल रही चिंताओं को दर्शाता है। मवेशियों की संख्या में गिरावट के कई कारण हैं, जिनमें प्राकृतिक आपदाएं जैसे सूखा और जंगल की आग शामिल हैं। इन आपदाओं ने न केवल मवेशियों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है, बल्कि उनके चारे की उपलब्धता को भी कम कर दिया है। पशुपालन के लिए आवश्यक चारे की कमी सीधे तौर पर मवेशियों के पालन-पोषण की लागत को बढ़ाती है, जिससे किसानों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, बीमारियों का प्रकोप भी मवेशियों की संख्या को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। 'न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म' जैसी बीमारियां, जिनके प्रसार को रोकने के लिए मैक्सिको से मवेशियों के आयात पर प्रतिबंध लगाए गए थे, पशुधन के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इन प्रतिबंधों का सीधा असर अमेरिकी बीफ उत्पादन पर पड़ा है, क्योंकि यह आयातित मवेशी अमेरिकी बाजार के लिए महत्वपूर्ण थे।
बाजार में बड़े व्यवधान भी उत्पादन को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, दक्षिणी सीमा पर बंदरगाहों का बंद होना, भले ही अस्थायी रूप से, मवेशियों की आवाजाही को बाधित करता है। इससे अमेरिका में संभावित रूप से उत्पादित होने वाले लाखों टन बीफ का उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, सरकार इन बंदरगाहों को धीरे-धीरे फिर से खोलने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगेगा और इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा।
बाइडेन प्रशासन की नीतियों और महंगाई को भी मवेशी झुंड में गिरावट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। प्रशासन का कहना है कि इन नीतियों के कारण किसानों की लागत बढ़ी है, जिससे उनके लिए मवेशी पालना और भी महंगा हो गया है। जब किसानों की लागत बढ़ती है, तो वे अक्सर उत्पादन कम कर देते हैं या कम मवेशी पालते हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं।
हालांकि, कुछ सकारात्मक संकेत भी दिख रहे हैं। जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी मवेशी झुंड में थोड़ी बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। प्रशासन का मानना है कि पशुपालक अब अधिक संख्या में बछियों को अपने पास रख रहे हैं, जो भविष्य में मवेशियों की संख्या बढ़ाने में मदद करेगा। यह 2018 के बाद पहली बार है जब कुल मवेशियों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद जगी है। यह एक महत्वपूर्ण विकास है क्योंकि यह दर्शाता है कि उद्योग धीरे-धीरे इन चुनौतियों से उबरने की कोशिश कर रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम, लीन बीफ ट्रिमिंग्स के आयात पर कम शुल्क वाली व्यवस्था को बढ़ाना, उपभोक्ताओं को राहत देने का एक प्रयास है। ग्राउंड बीफ, जो कई घरों में एक मुख्य भोजन है, की कीमतें कम होने से आम लोगों को फायदा होगा। यह कदम विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। आयातित बीफ की कीमतों की निगरानी का निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए है कि इस व्यवस्था का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे और विदेशी उत्पादकों को अनुचित लाभ न मिले। यदि कीमतें कम नहीं होतीं, तो राष्ट्रपति इस व्यवस्था को समाप्त करने की चेतावनी भी दे चुके हैं, जो बाजार में प्रतिस्पर्धा और निष्पक्षता बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह पूरा मामला अमेरिका के कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद जटिलताओं को उजागर करता है। जलवायु परिवर्तन, बीमारियों का खतरा, वैश्विक व्यापार नीतियां और घरेलू आर्थिक स्थितियां सभी मिलकर मवेशी उत्पादन को प्रभावित करते हैं। सरकार इन चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न उपायों का उपयोग कर रही है, जिसमें आयात कोटे को बढ़ाना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना शामिल है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये उपाय कितने प्रभावी साबित होते हैं और अमेरिकी उपभोक्ताओं को कब तक राहत मिलती है।