नेपाल में भोटेकोसी नदी की बाढ़: भारत ने भेजी 37.5 टन राहत सामग्री, 162 शव बरामद

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नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। भारत ने नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री भेजने का अपना अभियान जारी रखा है। भारत ने गुरुवार को 37.5 टन मानवीय सहायता, दवाइयां और खाद्य पैकेट की दूसरी खेप भेजी है, जबकि बुधवार को 10 टन की पहली खेप भेजी गई थी। भारत नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस भीषण बाढ़ में अब तक 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं।

भारत की ओर से नेपाल को लगातार मदद मिल रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि राहत सामग्री की दूसरी खेप भी नेपाल के लिए रवाना हो चुकी है। इस खेप में 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और राहत व बचाव कार्यों में हर संभव सहयोग जारी रखेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी 'एक्स' पर पोस्ट कर इस बात की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, "नेपाल के लिए 37.5 टन एचएडीआर सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट लेकर दूसरी उड़ान रवाना हो चुकी है। भारत ने दोहराया है कि वह इस कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और चल रहे राहत प्रयासों को पूरा समर्थन देता रहेगा।" इससे पहले बुधवार को भारत ने 10 टन मानवीय सहायता भेजी थी, जिसे नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपा था। इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए जरूरी राहत सामग्री शामिल थी।

नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। गुरुवार सुबह तक, इस भीषण बाढ़ में बह गए 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार, ये शव भोटेकोसी और त्रिशूल नदी प्रणालियों के निचले इलाकों के कई जिलों में नदी के किनारों से मिले हैं। इन जिलों में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) शामिल हैं।

यह विनाशकारी बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी नदी की एक सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अचानक रुक गया। इसके बाद, नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव सबसे पहले प्रभावित हुआ। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उस इलाके में बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए लोगों को इस आपदा के आने का कोई अंदाजा नहीं था। बाढ़ आने के समय लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लगे हुए थे, और अचानक आई इस तबाही ने उन्हें चौंका दिया।

भारत सरकार ने इस मुश्किल घड़ी में नेपाल की मदद के लिए तुरंत कदम उठाए हैं। राहत सामग्री की पहली खेप बुधवार को भेजी गई थी, जिसमें बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक चीजें शामिल थीं। भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने खुद यह राहत सामग्री नेपाल के मंत्री को सौंपी, जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा का उदाहरण है जो अप्रत्याशित रूप से आ सकती है। हिमस्खलन के कारण नदी के प्रवाह का रुकना और फिर अचानक बाढ़ का आना एक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत की ओर से लगातार भेजी जा रही राहत सामग्री नेपाल के लोगों को इस मुश्किल समय से उबरने में मदद करेगी। भारत का यह कदम न केवल मानवीय सहायता का प्रतीक है, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती और सहयोग को भी दर्शाता है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, और भारत हर संभव प्रयास कर रहा है ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके।