ओंकारेश्वर में भव्य पंचायतन मंदिर का निर्माण शुरू, 45 पवित्र शिलाओं का हुआ पूजन
ओंकारेश्वर में भव्य पंचायतन मंदिर का निर्माण शुरू, 45 पवित्र शिलाओं का हुआ पूजन
NewsPoint•
ओंकारेश्वर, 27 अगस्त: मध्य प्रदेश की पावन नगरी ओंकारेश्वर में 'एकात्म धाम' में भव्य 'पंचायतन मंदिर' का निर्माण 45 पवित्र शिलाओं के पूजन के साथ शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संतों और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में इन शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण की शुरुआत की। यह मंदिर भगवान शंकराचार्य की उस भूमि पर बन रहा है, जहाँ उन्होंने शिष्यत्व ग्रहण कर सनातन चेतना के प्रसार का संकल्प लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ से पहले ओंकारेश्वर में घाटों के निर्माण सहित कई विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह 'पंचायतन मंदिर' जगतगुरु श्री आदि शंकराचार्य द्वारा विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए पुनर्जीवित की गई 'पंचायतन पूजन' की प्राचीन शैली पर आधारित है। इस मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा। इसके चारों कोनों पर उप-देवालय बनाए जाएंगे। ईशान कोण में भगवान विष्णु, आग्नेय कोण में भगवान सूर्य, नैऋत्य कोण में भगवान गणेश और वायव्य कोण में भगवती शक्ति का स्थान होगा। मुख्य देवालय का शिखर 'सोमतिलक' शैली का होगा, जबकि गर्भगृह 'सर्वतोभद्र' शैली में बनेगा, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश द्वार होंगे।इस भव्य मंदिर के निर्माण में 80,000 घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 छोटे 'संवर्णा' (सामरण) स्थापित किए जाएंगे। शानदार तोरण-द्वार मंदिर की सुंदरता को और बढ़ाएंगे। 'पंचायतन मंदिर' के मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का एक विशाल कलात्मक गुंबद होगा, जो मंदिर की भव्यता का मुख्य आकर्षण बनेगा। यह पूरा मंदिर 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान यानी 'जगति' पर टिका होगा।
मंदिर का बाहरी वास्तु-विन्यास (मंडोवर) भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं के सुंदर संयोजन से सजाया जाएगा। पूरा मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा। यह 'पंचायतन मंदिर' सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला के पुनरुत्थान का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करेगा। यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में बनाया जा रहा है, जो भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक गरिमा का जीवंत प्रतीक बनेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा, "ओंकारेश्वर धाम में आज ‘पंचायतन मंदिर’ के शिला पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह वही पावन भूमि है, जहां भगवान शंकराचार्य जी महाराज ने शिष्यत्व ग्रहण कर सनातन चेतना और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया था। एकात्म धाम में भव्य पञ्चायतन मंदिर का शिलान्यास हमारे लिए सौभाग्य और गौरव का विषय है।" उन्होंने आगे कहा कि सिंहस्थ से पहले ओंकारेश्वर में अनेक विकास कार्य पूर्ण किए जाएंगे, जिनमें पञ्चायतन मंदिर के साथ ही घाटों का निर्माण कार्य भी शामिल है। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के विकास और उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जगतगुरु श्री आदि शंकराचार्य ने विभिन्न पूजा-पाठ की पद्धतियों के बीच तालमेल बिठाने के लिए 'पंचायतन पूजन' को फिर से शुरू किया था। इस शैली में, मुख्य देवता के चारों ओर चार अन्य देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला की समृद्ध विरासत को दर्शाता है और आने वाली पीढ़ियों को हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेगा।