अमेरिका ने नेपाल के रसुवा जिले में बाढ़ पीड़ितों के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता और डिजास्टर रिस्पॉन्स एडवाइजर भेजा

NewsPoint
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वॉशिंगटन, 27 अगस्त. अमेरिका ने नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद वहां एक आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार भेजा है और पांच लाख डॉलर की तत्काल सहायता भी दे रहा है. इस भयानक बाढ़ में कई लोगों की जान चली गई और भारी तबाही हुई है. अमेरिकी विदेश विभाग ने इस मदद का ऐलान किया है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र भी नेपाल सरकार के साथ मिलकर राहत और बचाव के कामों में मदद के लिए ज़रूरी सामान और लोगों को जुटा रहा है.

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वे नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और उनके करीबियों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं. इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के साथ उनकी संवेदनाएं हैं. विदेश विभाग ने बताया कि वे बाढ़ से प्रभावित इलाके की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए हैं. वहां भेजा गया आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार राहत कामों में मदद करेगा.
यह पांच लाख डॉलर की मदद अमेरिकी विदेश विभाग के एक खास कार्यक्रम के तहत कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज के ज़रिए दी जाएगी. इस पैसे का इस्तेमाल लोगों को फौरन रहने के लिए जगह (शेल्टर) देने और राहत का सामान बांटने में होगा. इसके अलावा, बाढ़ से प्रभावित समुदायों को साफ पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं मुहैया कराने में भी मदद मिलेगी.

विदेश विभाग ने यह भी बताया कि काठमांडू में मौजूद अमेरिकी दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों का पता लगाने और उनकी मदद करने का काम कर रहा है. प्रभावित इलाकों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को स्थानीय खबरों पर ध्यान देने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किए गए निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख जताया है. इस आपदा में लोगों की जान गई है, कई लोग लापता हैं और बहुत बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. न्यूयॉर्क में जारी एक बयान में उनके प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा, "महासचिव नेपाल और चीन में आई गंभीर बाढ़ से दुखी हैं, जिसने कई लोगों की जान ले ली है, कई लोग लापता हैं और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है. वे पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं. वे इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के साथ अपनी एकजुटता प्रकट करते हैं."

संयुक्त राष्ट्र नेपाल सरकार की मदद कर रहा है, जबकि अधिकारी आपदा से हुए असली नुकसान का अंदाज़ा लगाने और फौरन राहत पहुंचाने में लगे हुए हैं. बयान के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय सहायता से जुड़े साथी संगठन बाढ़ से प्रभावित समुदायों तक मदद पहुंचाने के लिए राहत सामग्री और लोगों को तेज़ी से जुटा रहे हैं. स्टीफन डुजारिक ने कहा, "महासचिव उन आपातकालीन राहतकर्मियों की सराहना करते हैं जो लोगों की जान बचाने के लिए काम कर रहे हैं, और संयुक्त राष्ट्र की ओर से हर संभव अतिरिक्त सहायता देने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं."

अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र, दोनों की घोषणाओं में फिलहाल सुरक्षित रहने के लिए ठिकाने, ज़रूरी राहत का सामान, साफ पीने का पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को सबसे अहम माना गया है. साथ ही, नुकसान का सही अंदाज़ा लगाने और यह तय करने के लिए भी काम किया जा रहा है कि प्रभावित समुदायों को आगे किस तरह की मदद की ज़रूरत होगी.

रसुवा जिले में आई इस अचानक बाढ़ ने तबाही मचाई है. पहाड़ी इलाका होने के कारण अचानक बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन इस बार की बाढ़ ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया. घरों के साथ-साथ सड़कें और पुल भी बह गए, जिससे राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं. स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है.

आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार का वहां पहुंचना राहत कार्यों को गति देगा. यह सलाहकार बाढ़ से हुए नुकसान का जायज़ा लेगा और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सबसे ज़रूरी कामों की पहचान करेगा. पांच लाख डॉलर की आर्थिक मदद से फौरन ज़रूरत की चीज़ें जैसे कि टेंट, कंबल, भोजन और दवाइयां पहुंचाई जाएंगी. कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज जैसी संस्थाएं इस मदद को ज़रूरतमंदों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी.

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है. वे न केवल राहत सामग्री जुटा रहे हैं, बल्कि अपने विशेषज्ञ कर्मियों को भी भेज रहे हैं जो आपदा प्रबंधन में माहिर हैं. बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए साफ पानी और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. स्वास्थ्य टीमें भी प्रभावित इलाकों में भेजी जा रही हैं ताकि किसी भी तरह की महामारी को फैलने से रोका जा सके.

काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास की भूमिका भी अहम है, खासकर उन अमेरिकी नागरिकों के लिए जो इस आपदा में फंस गए हैं. दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें हर संभव मदद पहुंचाने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहा है. अमेरिकी नागरिकों को भी सलाह दी गई है कि वे स्थानीय समाचारों पर नज़र रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का बयान इस आपदा की गंभीरता को दर्शाता है. उन्होंने न केवल नेपाल और चीन में आई बाढ़ पर दुख व्यक्त किया है, बल्कि राहत कार्यों में लगे लोगों की सराहना भी की है. यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा है.

यह आपदा एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए. नेपाल जैसे देश, जो भौगोलिक रूप से संवेदनशील हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मदद की हमेशा ज़रूरत रहती है. अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की यह पहल सराहनीय है और उम्मीद है कि इससे प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत मिलेगी और वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकेंगे. नुकसान का सही आकलन होने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी, जिसमें पुनर्निर्माण और भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के उपाय शामिल होंगे.