चेन्नई ऑटो रिक्शा किराया वृद्धि: यूनियन की तमिलनाडु सरकार से मांग, 60 रुपये न्यूनतम किराया

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चेन्नई, 27 अगस्त. तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा चालकों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है. सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस से जुड़ी ऑटो-टैक्सी वर्कर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार विधानसभा में किराए में संशोधन की घोषणा नहीं करती है, तो वे आंदोलन शुरू कर देंगे. एसोसिएशन ने शुरुआती 1.5 किलोमीटर के लिए कम से कम 60 रुपये किराया और उसके बाद हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 30 रुपये तय करने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही, सामान्य किराए का डेढ़ गुना नाइट टैरिफ और 1 रुपये प्रति मिनट का वेटिंग चार्ज भी मांगा गया है. यह मांगें ऐसे समय में आई हैं जब परिवहन मंत्री ए. विजय तमिलन पार्थिबन शुक्रवार को विधानसभा में विभाग के लिए अनुदान की मांगें पेश करेंगे.

ऑटो-टैक्सी वर्कर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी एस. बालासुब्रमण्यम ने बताया कि ये प्रस्ताव 9 जुलाई को परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में हुई एक त्रिपक्षीय बैठक में सरकार को सौंपे गए थे. यूनियनों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें, गाड़ियों के रखरखाव का खर्च, इंश्योरेंस प्रीमियम और महंगाई के कारण ऑटो चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. उनका तर्क है कि मौजूदा किराया ऑटो-रिक्शा चलाने की असली लागत को नहीं दिखाता है. इसलिए, सरकार से अपील की गई है कि बदले हुए किराए के ढांचे को तुरंत अंतिम रूप दिया जाए और उसका नोटिफिकेशन जारी किया जाए.
यूनियनों ने ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए कड़े नियम बनाने या उनके संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने की अपनी मांग भी दोहराई है. उनका आरोप है कि बाइक टैक्सी सेवाएं ऑटो-रिक्शा से यात्रियों को छीन रही हैं, जिससे ड्राइवरों की रोज की कमाई कम हो रही है. एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि तमिलनाडु में लगभग पांच लाख परिवार सीधे या परोक्ष रूप से ऑटो-रिक्शा क्षेत्र पर निर्भर हैं. इसलिए, सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह वैकल्पिक यात्री सेवाओं को नियंत्रित करे और एक उचित किराया ढांचा लागू करके इन परिवारों की आजीविका की रक्षा करे.

इस मामले पर गंभीरता से विचार करने के लिए, ट्रांसपोर्ट और रोड सेफ्टी कमिश्नर सिगी थॉमस वैद्यन ने गुरुवार को ऑटो ड्राइवर यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलाई है. इस बैठक में टैरिफ स्ट्रक्चर, मीटर-आधारित किराए को लागू करने, वेटिंग चार्ज, नाइट टैरिफ और बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़ी चिंताओं पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है.

यह ध्यान देने योग्य है कि तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा का किराया आखिरी बार अगस्त 2013 में पिछली एआईएडीएमके सरकार के दौरान बदला गया था. तब शुरुआती 1.8 किलोमीटर के लिए किराया 25 रुपये और हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 12 रुपये तय किया गया था. तब से लेकर अब तक, परिचालन लागतों में काफी वृद्धि हुई है, जिससे चालकों के लिए अपनी आजीविका चलाना मुश्किल हो गया है.

ऑटो चालकों की मांगें जायज हैं क्योंकि महंगाई की मार सभी पर पड़ रही है. पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, गाड़ियों के पुर्जे महंगे हो गए हैं और बीमा प्रीमियम भी बढ़ गया है. इन सब खर्चों को देखते हुए, मौजूदा किराया दरें ऑटो चालकों के लिए पर्याप्त नहीं हैं. वे सिर्फ अपनी रोजी-रोटी चलाने लायक ही कमा पा रहे हैं, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है.

सरकार को इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए और ऑटो चालकों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए. एक उचित किराया ढांचा लागू करने से न केवल ऑटो चालकों को राहत मिलेगी, बल्कि यात्रियों को भी एक पारदर्शी और न्यायसंगत सेवा मिलेगी. इसके अलावा, ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं के नियमन से बाजार में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और सभी को समान अवसर मिलेंगे.

ऑटो-रिक्शा तमिलनाडु की परिवहन व्यवस्था का एक अभिन्न अंग हैं. ये लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और शहरों में लोगों के आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए, सरकार का यह कर्तव्य है कि वह इस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करे और चालकों के हितों की रक्षा करे. उम्मीद है कि आगामी बैठक में इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे.