इटली के रक्षा मंत्री क्रोसेटो ने नाटो समिट पर जताई उम्मीद, अमेरिका संग संबंधों पर बोले
इटली के रक्षा मंत्री क्रोसेटो ने नाटो समिट पर जताई उम्मीद, अमेरिका संग संबंधों पर बोले
NewsPoint•
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने रविवार को कहा कि नाटो शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी देशों को अपने वादे पूरे करने होंगे और अपना योगदान देना होगा। उन्होंने यह बात 'पेंटेलेरिया मेडिटेरेनियो डी'ऑटोर' कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कही। क्रोसेटो ने अमेरिका के साथ इटली के संबंधों को मजबूत बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबाव बनाने वाली शैली का भी जिक्र किया, जिसे वे सहयोगियों से प्रतिक्रिया लेने का तरीका मानते हैं। रक्षा खर्च पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सामाजिक खर्चों का विकल्प नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी शक्तियों के बीच तकनीक, कच्चे माल और ऊर्जा को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका जताई। क्रोसेटो ने द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित देशों जैसे इटली, जर्मनी और जापान की स्थिति पर भी प्रकाश डाला, जो सीधे युद्ध की घोषणा नहीं कर सकते और गठबंधनों के तहत काम करते हैं। उन्होंने अमेरिकी ठिकानों से इटली में उड़ानों को लेकर हुए विवादों को टाला जा सकने वाला बताया और कहा कि सरकार ने जरूरत पड़ने पर 'ना' भी कहा है, क्योंकि ऐसे मुद्दे द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने अंकारा में होने वाले नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) शिखर सम्मेलन को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन को इस तरह से तैयार किया गया है कि सब कुछ सुचारू रूप से चले। सभी देशों को अपने वादों का पालन करना होगा और यह दिखाना होगा कि उन्होंने अपना हिस्सा पूरा किया है। क्रोसेटो ने यह बातें वीडियो के माध्यम से ‘पेंटेलेरिया मेडिटेरेनियो डी’ऑटोर’ कार्यक्रम में कहीं।अमेरिका के साथ इटली के संबंधों पर बात करते हुए मंत्री क्रोसेटो ने कहा कि "अमेरिका के साथ असली रिश्ते बहुत अच्छे हैं, जैसे एक साल पहले या पांच साल पहले थे।" उन्होंने यह भी बताया कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत लगातार संस्थागत स्तर पर चलती रहती है। यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं।
इटैलियन न्यूज एजेंसी एडनक्रोनोस की रिपोर्ट के अनुसार, क्रोसेटो ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “ट्रंप की अपनी राजनीति करने की शैली है, जिसमें वह सहयोगी देशों पर दबाव डालते हैं।” मंत्री के अनुसार, यह उनका तरीका है जिससे वे सहयोगियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करते हैं।
रक्षा खर्च के मुद्दे पर क्रोसेटो ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि रक्षा खर्च और सामाजिक खर्चों में कोई टकराव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा कि रक्षा खर्च स्वास्थ्य, संस्कृति और कल्याण के विकल्प के रूप में होना चाहिए।" उनका मानना है कि "बिना रक्षा के न सुरक्षा है और न ही सामाजिक खर्च संभव है।" इसका मतलब है कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना सामाजिक विकास के लिए भी उतना ही जरूरी है।
मंत्री ने गठबंधनों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हालात पर बात करते हुए कहा कि बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से तकनीक, कच्चे माल, रेयर अर्थ्स (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) और ऊर्जा को लेकर होगी। ये वे चीजें हैं जो आज के समय में देशों की ताकत तय करती हैं।
क्रोसेटो ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में इटली, जर्मनी और जापान जैसे देश, जो द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित हुए थे और जिनके संविधान युद्ध रोकने के लिए बनाए गए थे, वे सीधे तौर पर युद्ध की घोषणा नहीं कर सकते। इसलिए, इन देशों को दूसरे देशों की तरह सीधे कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें गठबंधनों या अंतरराष्ट्रीय मंजूरी के तहत काम करना पड़ता है।
अमेरिकी ठिकानों से इटली में उड़ानों को लेकर हुए विवादों पर मंत्री ने कहा कि ये ऐसे विवाद थे जिन्हें टाला जा सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां जरूरी था, वहां इस सरकार ने ‘ना’ भी कहा है। उनके अनुसार, ऐसे मुद्दे कभी-कभी अमेरिका के साथ रिश्तों में गलत संदेश दे सकते हैं और द्विपक्षीय संबंधों को मदद नहीं करते। यह दर्शाता है कि इटली अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को लेकर सजग है।