वायनाड भूस्खलन: पांच की मौत, तीन लापता, राहत कार्य जारी
वायनाड भूस्खलन: पांच की मौत, तीन लापता, राहत कार्य जारी
NewsPoint•
केरल के वायनाड जिले में मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर मंगलवार को हुए भयानक भूस्खलन में कम से कम पांच मजदूरों की जान चली गई, जबकि तीन लोग अभी भी लापता हैं. सात घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. यह हादसा लगातार हो रही भारी बारिश के कारण खुदाई से निकली मिट्टी के विशाल ढेर के ढह जाने से हुआ. अधिकारियों का कहना है कि यह प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवजनित आपदा प्रतीत होती है, क्योंकि निर्माण कंपनी को मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया. राहत और बचाव कार्य जारी हैं, और सरकार ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है.
वायनाड में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना हुई. मेप्पाडी-कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें कम से कम पांच मजदूरों की मौत हो गई. तीन लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं और उनकी तलाश जारी है. सात घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. राहत और बचाव दल पूरी ताकत से जुटे हुए हैं. वे भारी मशीनों, खोजी कुत्तों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करके मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि लापता मजदूरों की तलाश के लिए रातभर बचाव अभियान चलेगा. मेप्पाडी पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है.यह हादसा कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ. यहां अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा था. शुरुआती जांच में पता चला है कि लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण खुदाई से निकली मिट्टी का एक बहुत बड़ा ढेर अचानक ढह गया. इसकी वजह से कार्यस्थल का एक बड़ा हिस्सा मलबे के नीचे दब गया. पिछले 24 घंटों में मेप्पाडी में 226 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जिसके कारण यह मिट्टी धंसने की घटना हुई.
भूस्खलन इतना भयानक था कि इसकी चपेट में एक चर्च और पास का एक मकान भी आ गया. गनीमत रही कि मकान में रहने वाला परिवार हज यात्रा के लिए मक्का गया हुआ था. चर्च भी घटना के समय खाली था. इस वजह से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया.
घटनास्थल के पास बस स्टॉप पर मौजूद एक दंपति ने बताया कि उन्होंने अचानक पहाड़ जैसी मिट्टी को नीचे गिरते देखा. वे तुरंत वहां से भाग निकले. महिला ने बताया कि गिरने के दौरान उसके हाथ में हल्की चोट आई, लेकिन वे दोनों बाल-बाल बच गए.
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने हालात की समीक्षा की और निर्देश दिया कि लापता लोगों को खोजने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं. उन्होंने राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीक को राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए वायनाड भेजा है.
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने कहा कि फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देना सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने हादसे के कारणों की व्यापक जांच कराने की भी मांग की है.
केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि उन्होंने Prime Minister Narendra Modi को इस घटना की जानकारी दे दी है. उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाया. उनका कहना था कि सुरंग निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी को हटाने के निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जो एक बड़ी लापरवाही है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में लापरवाही साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना जताई है. उन्होंने कहा कि लापता लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए राहत कार्यों में सहयोग करने की अपील की है.
लोक निर्माण मंत्री पी.के. बशीर ने बताया कि 10 जून को इस स्थल को लेकर शिकायतें मिली थीं. इसके बाद 25 जून को अधिकारियों ने इसका निरीक्षण किया था. उन्होंने बताया कि निर्माण कंपनी को खुदाई से निकली मिट्टी हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे. लेकिन ऐसा लगता है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया.
कृषि मंत्री टी. सिद्दीक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर कहा कि यह घटना प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवजनित आपदा लगती है. उन्होंने कहा कि सरकार इस बात की जांच करेगी कि पहले दी गई चेतावनियों के बावजूद आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए.
जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने वाले करीब 400 परिवारों का आकलन शुरू कर दिया है. संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है. साथ ही, वायनाड जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में बुधवार को अवकाश घोषित किया गया है.
यह हादसा 30 जुलाई 2024 को मुंडक्कई-चूरलमाला में हुए विनाशकारी भूस्खलन की दूसरी बरसी से महज 23 दिन पहले हुआ है. उस त्रासदी में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग लापता हो गए थे.
यह अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना 2,134 करोड़ रुपये की लागत से बन रही है. इस परियोजना का निर्माण Bhopal स्थित दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कर रही है. वहीं, पहुंच मार्ग का निर्माण रॉयल इंफ्रा कंस्ट्रक्शन के जिम्मे है. परियोजना का प्रबंधन कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड कर रहा है.