राम मंदिर चंदा चोरी, वक्फ बोर्ड पर एसटी हसन की तीखी टिप्पणी, भाजपा पर साधा निशाना

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Navbharat Times
मुरादाबाद, 7 जुलाई। Samajwadi Party के पूर्व सांसद एसटी हसन ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले, भाजपा नेताओं के बयानों और Madhya Pradesh वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने जैसे मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के अखिलेश यादव पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आरोप लगाने वालों को अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने चाहिए। एसटी हसन ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार बनने के दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण के बाद भाजपा की असलियत जनता के सामने आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने भगवान राम की आस्था का राजनीतिक इस्तेमाल किया है, लेकिन उनके आदर्शों का पालन नहीं किया। एसटी हसन ने सवाल उठाया कि क्या भगवान राम ने कभी अन्याय करने, भीड़ हिंसा को बढ़ावा देने या दूसरे धर्मों के लोगों के साथ भेदभाव करने की शिक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान राम के नाम पर राजनीति करते हैं, वे उनके आदर्शों के अनुरूप आचरण नहीं कर रहे हैं। नितिन नवीन के उत्तर प्रदेश दौरे और अखिलेश यादव की उस टिप्पणी पर, जिसमें उन्होंने भाजपा अध्यक्ष के अयोध्या दर्शन को लेकर तंज कसा था, एसटी हसन ने कहा कि भाजपा नेताओं की कथनी और करनी में अंतर है। जनता अब राजनीतिक नारों और वादों से आगे बढ़ चुकी है और केवल बयानों के आधार पर किसी पर विश्वास नहीं करेगी।

पूर्व सांसद ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के उस दावे पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव और आरोपी टिन्नू यादव के बीच बातचीत का आरोप लगाया था। एसटी हसन ने कहा कि यदि ऐसा कोई दावा किया जा रहा है तो उसे साबित भी किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी का फोन आ जाए या किसी से बातचीत हो जाए, तो केवल उसी आधार पर उसे किसी अपराध में शामिल नहीं माना जा सकता। इस तरह के आरोप लगाने से पहले तथ्यों और साक्ष्यों को सामने लाना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामले को सार्वजनिक रूप से सबसे पहले अखिलेश यादव ने ही उठाया था। जब यह मामला सामने आया, तब उसके बाद आरोपों का रुख अखिलेश यादव की ओर मोड़ने का प्रयास किया गया। एसटी हसन ने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर से जुड़े विवाद का समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से हो चुका है और Samajwadi Party ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को स्वीकार किया था। अब मूल मुद्दा कथित चंदा चोरी के आरोपों की जांच और उसके तथ्यों पर होना चाहिए, न कि पुराने राजनीतिक विवादों को दोहराने पर।
Madhya Pradesh वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर भी पूर्व सांसद ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में संबंधित धर्म की परंपराओं और धार्मिक प्रक्रियाओं की जानकारी आवश्यक होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिर ट्रस्टों में सामान्यतः मुस्लिम सदस्य नहीं होते और मस्जिद समितियों में भी परंपरागत रूप से अन्य धर्मों के लोग शामिल नहीं होते, उसी प्रकार वक्फ बोर्ड जैसे धार्मिक संस्थानों का संचालन भी संबंधित समुदाय की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए। एसटी हसन का मानना है कि धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन में उन लोगों की भूमिका अधिक उपयुक्त होती है जो उनकी धार्मिक परंपराओं, नियमों और कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हों। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने भगवान राम की आस्था का राजनीतिक इस्तेमाल किया है, लेकिन उनके आदर्शों का पालन नहीं किया। भगवान राम ने न्याय, मानवता और सद्भाव का संदेश दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवान राम ने कभी किसी के साथ अन्याय करने, भीड़ हिंसा को बढ़ावा देने या दूसरे धर्मों के लोगों के साथ भेदभाव करने की शिक्षा दी थी। जो लोग भगवान राम के नाम पर राजनीति करते हैं, वे उनके आदर्शों के अनुरूप आचरण नहीं कर रहे हैं।

एसटी हसन ने भाजपा नेताओं की कथनी और करनी में अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता अब राजनीतिक नारों और वादों से आगे बढ़ चुकी है और केवल बयानों के आधार पर किसी पर विश्वास नहीं करेगी। उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सोशल मीडिया पर किए गए उस दावे पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें अखिलेश यादव और आरोपी टिन्नू यादव के बीच बातचीत का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई दावा किया जा रहा है तो उसे प्रमाणित भी किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी का फोन आ जाए या किसी से बातचीत हो जाए, तो केवल उसी आधार पर उसे किसी अपराध में शामिल नहीं माना जा सकता। इस प्रकार के आरोप लगाने से पहले तथ्यों और साक्ष्यों को सामने लाना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामले को सार्वजनिक रूप से सबसे पहले अखिलेश यादव ने उठाया था। जब यह मामला सामने आया, तब उसके बाद आरोपों का रुख अखिलेश यादव की ओर मोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। राम मंदिर से जुड़े विवाद का समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से हो चुका है और Samajwadi Party ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को स्वीकार किया था। अब मूल मुद्दा कथित चंदा चोरी के आरोपों की जांच और उसके तथ्यों पर होना चाहिए, न कि पुराने राजनीतिक विवादों को दोहराने पर।

Madhya Pradesh वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर एसटी हसन ने अपनी आपत्ति दोहराई। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में संबंधित धर्म की परंपराओं और धार्मिक प्रक्रियाओं की जानकारी आवश्यक होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिर ट्रस्टों में सामान्यतः मुस्लिम सदस्य नहीं होते और मस्जिद समितियों में भी परंपरागत रूप से अन्य धर्मों के लोग शामिल नहीं होते, उसी प्रकार वक्फ बोर्ड जैसे धार्मिक संस्थानों का संचालन भी संबंधित समुदाय की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए। धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन में उन लोगों की भूमिका अधिक उपयुक्त होती है जो उनकी धार्मिक परंपराओं, नियमों और कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हों। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने भगवान राम की आस्था का राजनीतिक इस्तेमाल किया है, लेकिन उनके आदर्शों का पालन नहीं किया। भगवान राम ने न्याय, मानवता और सद्भाव का संदेश दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवान राम ने कभी किसी के साथ अन्याय करने, भीड़ हिंसा को बढ़ावा देने या दूसरे धर्मों के लोगों के साथ भेदभाव करने की शिक्षा दी थी। जो लोग भगवान राम के नाम पर राजनीति करते हैं, वे उनके आदर्शों के अनुरूप आचरण नहीं कर रहे हैं।