कोयंबटूर को बड़ी पेयजल योजना का हस्तांतरण: पिल्लूर-III अब नगर निगम के अधीन

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कोयंबटूर, 7 जुलाई: तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड ने पिल्लूर-III पेयजल आपूर्ति योजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी कोयंबटूर सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह 779 करोड़ रुपये की लागत वाली कोयंबटूर की सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं में से एक है, जो प्रतिदिन लगभग 178 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आपूर्ति करती है। योजना का निर्माण पूरा होने के बाद, इसके संचालन और रखरखाव की निर्धारित अवधि छह महीने पहले ही समाप्त हो चुकी थी, लेकिन बोर्ड अंतरिम व्यवस्था के तहत इसका प्रबंधन कर रहा था। अब, नगर निगम द्वारा चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद, बोर्ड ने औपचारिक हस्तांतरण के लिए पत्र लिखा है, जिसकी अगस्त तक पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि, 178 एमएलडी क्षमता वाला जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) अगले सात वर्षों तक तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड के नियंत्रण में ही रहेगा, क्योंकि परियोजना समझौते के तहत इसे 10 साल तक संचालित करना है।

यह कदम कोयंबटूर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाएगा। पिल्लूर-III योजना, जो 2024 में शुरू हुई थी, शहर के कई हिस्सों में पानी की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड ने इस परियोजना का निर्माण तो पूरा कर लिया था, लेकिन इसके संचालन और रखरखाव की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह इसका प्रबंधन कर रहा था। अब, जब नगर निगम अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए तैयार है, तो यह हस्तांतरण प्रक्रिया शुरू की गई है।
कोयंबटूर नगर निगम के आयुक्त कट्टा रवि तेजा ने हाल ही में पिल्लूर बांध का दौरा कर सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने योजना को औपचारिक रूप से सौंपे जाने से पहले इसके गहन मूल्यांकन के लिए एक तकनीकी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह समिति परियोजना के पूरे ढांचे की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट तमिलनाडु के नगर प्रशासन निदेशक एस. शिवरासु को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर, नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग से अंतिम मंजूरी ली जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह पूरी प्रक्रिया अगस्त महीने तक पूरी हो जाएगी।

हस्तांतरण पूरा होने के बाद, कोयंबटूर नगर निगम योजना के मुख्य ढांचे के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। इसमें कच्चे और शुद्ध पानी की पाइपलाइनें, फीडर मेन लाइनें, वितरण नेटवर्क, बड़े जल भंडारण टैंक (एमएसटी), चार हाई-कैपेसिटी मोटर पंपों से लैस पंपिंग स्टेशन और अन्य संबंधित सुविधाएं शामिल होंगी। यह नगर निगम के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी, क्योंकि यह शहर की पेयजल आपूर्ति की रीढ़ है।

हालांकि, एक महत्वपूर्ण हिस्सा अभी भी तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड के नियंत्रण में रहेगा। 178 एमएलडी क्षमता वाला जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) परियोजना समझौते के अनुसार, बोर्ड द्वारा 10 वर्षों तक संचालित और अनुरक्षित किया जाएगा। इस समझौते को लगभग तीन साल बीत चुके हैं, इसलिए यह संयंत्र अगले सात वर्षों तक तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड के अधीन ही रहेगा। इसके बाद ही इसे नगर निगम को सौंपा जाएगा।

कोयंबटूर शहर को सिरुवानी और पिल्लूर जलाशयों के अलावा अलीयार बांध से भी पेयजल मिलता है। पिल्लूर जलाशय का पानी पिल्लूर-I, पिल्लूर-II, पिल्लूर-III और कावुंडमपालयम-वडावल्ली-वीरकेरलम (केवीवी) संयुक्त जल आपूर्ति योजना के माध्यम से वितरित किया जाता है। यह हस्तांतरण इसलिए भी आवश्यक हो गया है क्योंकि तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड तय अवधि से काफी अधिक समय तक संचालन और रखरखाव का खर्च उठा रहा था। अब, इस पेयजल योजना का दैनिक प्रबंधन नगर निगम को सौंपना उचित माना जा रहा है, ताकि बोर्ड अपने संसाधनों को अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर केंद्रित कर सके। यह कदम शहरवासियों के लिए पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।