भारत का पहला इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (isp) 14 जुलाई को जारी होगा, सेवा क्षेत्र की सटीक माप
भारत का पहला इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) 14 जुलाई को जारी होगा, सेवा क्षेत्र की सटीक माप
NewsPoint•
नई दिल्ली, 7 जुलाई। केंद्र सरकार ने देश के पहले 'इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी)' के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया है। इसका पहला मासिक ट्रायल 14 जुलाई को जारी किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह भारत के सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन को बेहतर ढंग से मापने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी। यह जानकारी मंगलवार को एक सरकारी बयान में दी गई।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MOSPI) के अनुसार, यह नया आईएसपी भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र की मासिक गतिविधियों का एक व्यापक आकलन देगा। यह मौजूदा इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का पूरक होगा और अर्थव्यवस्था पर बेहतर नजर रखने में मदद करेगा। भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान लगभग 53% ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) है। यह क्षेत्र बड़ी संख्या में रोजगार देता है और आर्थिक विकास, निवेश और निर्यात का भी एक प्रमुख जरिया है।मंत्रालय ने बताया कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद देश की सांख्यिकीय प्रणाली काफी मजबूत हुई है। अब लाखों व्यवसायों द्वारा हर महीने दर्ज किए जाने वाले बाहरी आपूर्ति के आंकड़ों के आधार पर सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का अधिक सटीक विश्लेषण संभव हो पाया है। इस नए इंडेक्स को बनाने के लिए GST नेटवर्क से मिले समेकित आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही रेलवे, विमानन, बैंकिंग और बीमा जैसे क्षेत्रों के प्रशासनिक डेटा का भी उपयोग होगा। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे GST से बाहर के क्षेत्रों को शामिल करने के लिए 'एनुअल सर्वे ऑफ अनइनकॉरपोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज इन सर्विसेज सेक्टर एंड एस्टैब्लिशमेंट्स (ASISSE)' के आंकड़ों का भी सहारा लिया जाएगा। हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया है कि इंडेक्स बनाने के लिए उन्हें किसी भी व्यक्ति के GST डेटा की जरूरत नहीं है और न ही वे ऐसे आंकड़ों तक पहुंच रखते हैं।
इस नए इंडेक्स को विकसित करने के लिए मई 2025 में 'इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (TAC-ISP)' पर एक तकनीकी सलाहकार समिति बनाई गई थी। इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष ने की। समिति ने इंडेक्स के वैचारिक, तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले अप्रैल 2026 में एक दृष्टिपत्र जारी कर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए थे।
रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है कि इस इंडेक्स को लासपेयर वॉल्यूम इंडेक्स के रूप में तैयार किया जाए और 2024-25 को इसका आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाया जाए। इसमें ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) के आधार पर भार तय किए जाएंगे। साथ ही, एनआईसी 2025 के दो-अंकीय स्तर पर विभिन्न सेवा क्षेत्रों के अलग-अलग सूचकांक भी प्रकाशित किए जाएंगे। समिति ने सुझाव दिया है कि शुरुआत में इस इंडेक्स और इसके उप-क्षेत्रों से जुड़े आंकड़ों को परीक्षण आधार पर जारी किया जाए। इससे विशेषज्ञों और हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसकी कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन हर महीने तैयार किया जाए और संबंधित महीने की समाप्ति के 60 दिनों के भीतर जारी कर दिया जाए। इससे नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और निवेशकों को भारत के सेवा क्षेत्र की स्थिति का समय पर और विश्वसनीय संकेत मिल सकेगा। यह कदम अर्थव्यवस्था की बेहतर निगरानी में मदद करेगा।
यह इंडेक्स भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है और इसका सटीक मापन आर्थिक नीतियों को बनाने में सहायक होगा। यह इंडेक्स न केवल सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन को ट्रैक करेगा, बल्कि विभिन्न उप-क्षेत्रों की वृद्धि और चुनौतियों को समझने में भी मदद करेगा। इससे निवेशकों को भी सही निर्णय लेने में आसानी होगी।
यह नया इंडेक्स भारत के आर्थिक डेटा संग्रह और विश्लेषण की क्षमता को भी बढ़ाएगा। GST के लागू होने से प्राप्त डेटा का उपयोग करके, सरकार अब सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का अधिक बारीकी से विश्लेषण कर सकती है। यह भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने में भी मदद करेगा।
यह इंडेक्स एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होगा जो नीति निर्माताओं को सेवा क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए लक्षित नीतियां बनाने में मदद करेगा। यह उद्योग जगत को भी बाजार के रुझानों को समझने और अपनी रणनीतियों को तदनुसार समायोजित करने में सहायता करेगा। कुल मिलाकर, यह भारत के सेवा क्षेत्र के लिए एक उज्जवल भविष्य का संकेत देता है।