बृजभूषण शरण सिंह ने हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर दी सफाई, कहा- सीढ़ियों पर नहीं परिसर में हुई थी नमाज

NewsPoint
Navbharat Times
भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को हनुमानगढ़ी को लेकर अपने पहले के बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि नमाज मंदिर की सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि 52 बीघा के परिसर के भीतर अदा की गई थी। यह सफाई ऐसे समय आई है जब हनुमानगढ़ी से जुड़े उनके बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर Samajwadi Party और कांग्रेस पर निशाना साधा था। यह पूरा विवाद 2003 की एक घटना से जुड़ा है, जब हनुमानगढ़ी के पास नमाज पढ़े जाने के दावे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि मीडिया ने उनसे सीधा सवाल पूछा था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। इस पर उन्होंने साफ तौर पर 'नहीं' कहा था। उन्होंने कहा, "मीडिया का सवाल बहुत सीधा था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। मैंने इसका साफ इनकार किया। हां, मुझे यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नहीं, लेकिन मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर नमाज पढ़ी गई थी, यह अलग बात है। जब मुझसे सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने के बारे में पूछा गया तो मैं इस सवाल से ही हैरान था और मैंने साफ तौर पर इसे नकार दिया।"
उन्होंने हनुमानगढ़ी के निर्माण को लेकर अपने पुराने बयान पर भी सफाई दी। उनका यह कहना कि 'हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था' अधूरा बयान था और इसे ऐतिहासिक तथा धार्मिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि इसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था, लेकिन वह पूरी बात नहीं थी। अगर ‘अयोध्या माहात्म्य’ को देखें तो भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि अयोध्या के मुख्य द्वार के उत्तर दिशा में भगवान हनुमान और दक्षिण दिशा में सुग्रीव विराजमान हैं। जब स्वयं भगवान शिव हनुमानगढ़ी के अस्तित्व का वर्णन करते हैं, तो यह किसी व्यक्ति द्वारा बनाई गई इमारत नहीं हो सकती। यह एक गढ़ी यानी किलेनुमा धार्मिक स्थल है।"

यह विवाद तब और गरमा गया जब उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए Samajwadi Party और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनकी पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। Chief Minister योगी ने सवाल उठाया, "क्या कोई जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करा सकता है? क्या Samajwadi Party या कांग्रेस की कोई Government ऐसा कर सकती है? फिर उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने देने जैसा पाप क्यों किया?"

यह पूरा मामला वर्ष 2003 की एक घटना से जुड़ा है। उस समय हनुमानगढ़ी के पास नमाज पढ़े जाने के दावे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस घटना ने राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस को जन्म दिया था। अब बृजभूषण शरण सिंह के नए स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक हनुमानगढ़ी के इतिहास और उसकी पवित्रता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच यह बहस जारी है।

हनुमानगढ़ी, अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। यह भगवान हनुमान को समर्पित है और इसका एक लंबा और समृद्ध इतिहास है। इस स्थल की पवित्रता और ऐतिहासिकता को लेकर हमेशा से ही लोगों की गहरी आस्था रही है। इसी आस्था के चलते इस स्थल से जुड़े किसी भी बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं। बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने इस विवाद को फिर से हवा दे दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पहले के बयान को अधूरा बताया है। उनका कहना है कि जब उनसे सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर मना कर दिया। लेकिन, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नमाज मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर पढ़ी गई थी, जो कि एक अलग बात है। यह स्पष्टीकरण विवाद को शांत करने के उद्देश्य से दिया गया है, लेकिन राजनीतिक माहौल में यह कितना प्रभावी होगा, यह देखना बाकी है।

इसके अलावा, हनुमानगढ़ी के निर्माण को लेकर उनके बयान पर भी सफाई दी गई है। उन्होंने कहा कि यह कहना कि 'हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था' एक अधूरा बयान था। उन्होंने 'अयोध्या माहात्म्य' का हवाला देते हुए बताया कि यह एक किलेनुमा धार्मिक स्थल है, जिसका वर्णन स्वयं भगवान शिव ने किया है। इसका मतलब है कि यह किसी एक व्यक्ति द्वारा बनाई गई इमारत नहीं हो सकती, बल्कि इसका एक गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।

Chief Minister योगी आदित्यनाथ के बयान ने इस मुद्दे को और भी राजनीतिक रंग दे दिया है। उन्होंने Samajwadi Party और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनकी सरकारों ने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति देकर पाप किया। यह बयान उस समय आया जब वह राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अयोध्या दौरे पर थे। उनके इस बयान ने राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया है।

यह पूरा विवाद 2003 की उस घटना से जुड़ा है, जब हनुमानगढ़ी के पास नमाज पढ़े जाने के दावे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। उस समय से लेकर आज तक यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है और राजनीतिक दलों के बीच बहस का विषय बनता रहा है। बृजभूषण शरण सिंह के नए स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस स्पष्टीकरण का राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।