जेपी नड्डा ने नीट पेपर लीक पर विपक्ष को घेरा, राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर उठाए सवाल

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 22 जुलाई: केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आज नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च, नीट पेपर लीक और राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की। नड्डा ने विशेष रूप से पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इस गंभीर समस्या पर गहनता से चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा 150 पेपर लीक के आरोपों को जांच का विषय बताते हुए कहा कि सरकार हर बात का जवाब जनता के सामने रखेगी, लेकिन साथ ही उन्होंने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन शासित राज्यों में हुए पेपर लीक की घटनाओं का भी जिक्र किया, जिन पर राहुल गांधी ने चुप्पी साधे रखी। नड्डा ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष को समय तय करना चाहिए ताकि एक ठोस नीति बनाई जा सके।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष, खासकर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, "छात्रों की जो मांग है, सबसे पहले मैं कहूंगा कि इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। ये एक गहन समस्या है और इस समस्या का गहनता से चर्चा करने की आवश्यकता है।" नड्डा ने राहुल गांधी द्वारा 150 पेपर लीक के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह जांच का विषय है और सरकार जनता के सामने हर बात का जवाब रखेगी। लेकिन, उन्होंने तुरंत ही विपक्ष की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए कई राज्यों में हुए पेपर लीक की घटनाओं का उदाहरण दिया, जहां कांग्रेस या उसके गठबंधन की सरकारें हैं।
नड्डा ने विस्तार से बताया कि कैसे जम्मू-कश्मीर में सेवा चयन बोर्ड (एससीएस) की परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक हुआ, जहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। इसी तरह, हिमाचल प्रदेश में विद्यालय परीक्षा बोर्ड (एससीएस) की परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक हुआ, जहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। झारखंड में जेएसी (विद्यालय चयन बोर्ड) में हिंदी और विज्ञान के प्रश्नपत्र लीक हुए, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है। तेलंगाना में इंटरमीडिएट परीक्षा में भाषा का प्रश्नपत्र लीक हुआ, जहां कांग्रेस और सीपीआई की सरकार है। उन्होंने यह भी बताया कि एसएससी परीक्षा में भी भाषा का प्रश्नपत्र लीक हुआ।

इन उदाहरणों को पेश करते हुए नड्डा ने राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा, "मैं आज यहां ये भी कहना चाहूंगा कि शाम 4 बजे विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें उन्होंने लगभग 150 पेपर लीक के बारे में चर्चा की। ये जांच का विषय है और इसके लिए सरकार हर बात का जवाब जनता के सामने रखेगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सेवा चयन बोर्ड (एससीएस) की परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक हुआ। यहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। हिमाचल प्रदेश में विद्यालय परीक्षा बोर्ड (एससीएस) की परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक हुआ। यहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है। झारखंड में जेएसी (विद्यालय चयन बोर्ड) में हिंदी और विज्ञान के प्रश्नपत्र लीक हुए। यहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है। तेलंगाना में इंटरमीडिएट परीक्षा में भाषा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। यहां कांग्रेस और सीपीआई की सरकार है। इसी तरह एसएससी परीक्षा में भी भाषा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। नड्डा ने कहा कि मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि वे इतने सेलेक्टिव क्यों हैं? आपने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन शासित राज्यों में हुए पेपर लीक के बारे में चर्चा क्यों नहीं की? यह स्पष्ट है कि आपको छात्रों के हितों की कोई परवाह नहीं है। आपका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना या छात्रों को न्याय दिलाना नहीं है। आप छात्रों के मुद्दे को उठाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ये तो केवल कुछ उदाहरण हैं, ऐसी घटनाओं की लिस्ट काफी लंबी है। मैं विपक्ष के नेता राहुल गांधी से पूछना चाहूंगा कि इस मुद्दे पर आपका रवैया चयनात्मक (सेलेक्टिव) क्यों है?"

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार पेपर लीक के मामले को लेकर गंभीर है और उसने इस पर क्या कदम उठाए हैं, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "पेपर लीक का मामला सरकार के सामने आने के बाद हमने क्या किया, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए। इसके साथ ही अन्य सरकारों को भी इस मामले को कैसे देखना चाहिए और किन बिंदुओं पर चर्चा करके समाधान निकालना जरूरी है, जिससे छात्रों के साथ अन्याय न हो, इस पर भी विचार होना चाहिए। सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और इसे गंभीरता से लिया है।" नड्डा ने यह भी कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में यह एक जिम्मेदार सरकार है, जो हमेशा सभी मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार रहती है।

नड्डा ने संसद में चर्चा के लिए सरकार की तत्परता को दोहराते हुए कहा, "हम चाहते थे कि इस पर (पेपर लीक) पार्लियामेंट में चर्चा हो। कम समय की चर्चा, लंबे समय की चर्चा, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में, आप तय करें कि आप कितना समय लेना चाहते हैं। आप 12 घंटे ले सकते हैं, आप 18 घंटे ले सकते हैं। राज्यसभा में सदन के नेता के तौर पर मेरा हमेशा से मानना रहा है कि विपक्ष जितने घंटे तय करेगा, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। सरकार चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि नकारात्मक राजनीति के बजाय, हमें यह सोचना चाहिए कि हम इस समस्या को कैसे हल कर सकते हैं, और संसद इसके लिए सबसे सही मंच है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे समय तय करें ताकि हर पहलू पर चर्चा हो सके और एक ठोस नीति बनाई जा सके।

बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए नड्डा ने कहा कि उनकी देखभाल करना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने फिर से राहुल गांधी पर सवाल उठाते हुए कहा, "विपक्ष को केवल कुछ मामलों को चुनकर नहीं उठाना चाहिए। यदि विपक्ष छात्रों के हितों को लेकर चिंतित है तो उसे सभी राज्यों और सभी सरकारों के दौरान हुई घटनाओं पर चर्चा करनी चाहिए। यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी पेपर लीक के कई मामले सामने आए थे, और आरोप-प्रत्यारोप से बाहर निकलकर संसद में इस गंभीर विषय पर चर्चा होनी चाहिए।

सीजेपी विरोध प्रदर्शन के संबंध में पूछे जाने पर नड्डा ने कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है और यदि कोई बात लिखित रूप में आती है तो उस पर विचार किया जाएगा। सोनम वांगचुक से मुलाकात पर उन्होंने बताया कि उनसे मुलाकात कर उनका हालचाल जाना गया है और उनके द्वारा पत्र भी लिखा गया है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर नड्डा ने कहा कि ऐसे मुद्दे इस तरह नहीं उठाए जाते। उन्होंने अंत में दोहराया कि सरकार संसद में बहस के लिए तैयार है और चर्चा के माध्यम से ही समाधान निकाला जाना चाहिए।