गाजा में चूहों का आतंक: संयुक्त राष्ट्र ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को रोकने के लिए प्रयास तेज किए

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Navbharat Times
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कर्मी और उनके साथी गाजा में चूहों के बढ़ते प्रकोप जैसी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में किए गए सर्वे में 83 फीसदी जगहों पर चूहों और अन्य परजीवियों का भारी संक्रमण पाया गया। इसके साथ ही सड़कों पर सीवेज का जमाव, रुका हुआ पानी और साफ-सफाई की बेहद खराब हालत भी देखी गई। इन हालातों से निपटने के लिए मानवीय साझेदार इस हफ्ते चूहों पर नियंत्रण के उपाय बढ़ा रहे हैं।

OCHA के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और अन्य साझेदार रोजाना नौ मीट्रिक टन चूहे मारने वाली दवाइयां बांट रहे हैं, जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात गाजा पहुंचा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरों को कम करने के लिए, स्पेयर पार्ट्स और इंजन ऑयल जैसे जरूरी उपकरण और सप्लाई तक लगातार पहुंच की तुरंत जरूरत है। यह भी महत्वपूर्ण है कि गाजा में ठोस कचरा प्रबंधन करने वाले साझेदारों को उन इलाकों में लैंडफिल तक पहुंचने की इजाजत मिले जहां इजरायली सेना ने पहुंच पर रोक लगा रखी है, जो गाजा पट्टी का लगभग 65 फीसदी हिस्सा है।
परिवारों के लिए पानी तक पहुंच भी एक रोज की चुनौती बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार लाखों बच्चों और उनके परिवारों को जरूरी पानी, सफाई और स्वच्छता (Hygiene) सेवाएं देकर उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उप-प्रवक्ता फरहान हक ने बताया कि खान यूनिस में यूनिसेफ एक मुख्य कुएं के निर्माण में मदद कर रहा है, जिससे करीब 7,000 लोगों को पानी मिल सकेगा। वहीं गाजा शहर में यूनिसेफ, शेख अजलीन वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई में जुटा है। लड़ाई से पहले यह प्लांट 7 लाख लोगों को सेवा देता था।

फरहान हक ने यह भी बताया कि यूएन ऑपरेशनल सैटेलाइट एप्लीकेशन प्रोग्राम और साझेदारों ने इस हफ्ते की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि लगभग 430,000 किंडरगार्टन और स्कूल जाने वाले बच्चों के नाम गाजा में 600 से ज्यादा अस्थायी लर्निंग स्पेस (सीखने की जगह) में दर्ज थे। यह अनुमानित छात्र आबादी का लगभग 56 फीसदी है। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ लर्निंग स्पेस में, बच्चों को नए स्कूल साल से पहले पढ़ाई में मदद करने के लिए प्रोग्राम चल रहे हैं, हालांकि स्कूल जाने वाले लगभग आधे बच्चों को अभी भी सीखने के सही मौके नहीं मिल पा रहे हैं।

गाजा में हालात बेहद चिंताजनक हैं। चूहों का प्रकोप सिर्फ एक समस्या नहीं है, बल्कि यह साफ-सफाई की कमी और बुनियादी ढांचे के टूटने का संकेत है। सीवेज का सड़कों पर बहना और पानी का जमाव बीमारियों को दावत दे रहा है। ऐसे में, चूहे मारने की दवाइयां बांटना एक अहम कदम है, लेकिन यह समस्या का पूरा समाधान नहीं है। इसके लिए हमें और भी बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है।

OCHA ने इस बात पर जोर दिया है कि स्पेयर पार्ट्स और इंजन ऑयल जैसे जरूरी सामानों की सप्लाई बहुत जरूरी है। इन चीजों के बिना, पानी और सीवेज सिस्टम को ठीक करना मुश्किल हो जाता है। सोचिए, अगर पानी के पंप खराब हो जाएं या सीवेज लाइनें जाम हो जाएं, तो क्या होगा? लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिलेगा और गंदगी का अंबार लग जाएगा। यह स्थिति और भी भयानक हो सकती है।

इसके अलावा, गाजा में कचरा प्रबंधन करने वाले लोगों को लैंडफिल तक पहुंचने की इजाजत मिलना भी बहुत जरूरी है। जब इजरायली सेना कुछ इलाकों में जाने से रोकती है, तो कचरा जमा होता रहता है। यह कचरा न केवल बदबू फैलाता है, बल्कि चूहों और अन्य कीड़ों के पनपने का एक बड़ा कारण बनता है। अगर कचरा सही जगह पर नहीं पहुंचेगा, तो यह समस्या कभी खत्म नहीं होगी।

बच्चों की शिक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय है। भले ही 600 से ज्यादा अस्थायी लर्निंग स्पेस बनाए गए हैं, लेकिन आधे से ज्यादा बच्चों को अभी भी ठीक से पढ़ने-लिखने का मौका नहीं मिल पा रहा है। यह बच्चों के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक है। संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार इन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए और भी ज्यादा मदद की जरूरत है।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि गाजा में मानवीय संकट सिर्फ एक समस्या तक सीमित नहीं है। यह कई समस्याओं का एक जाल है, जिसमें स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र और उसके साथी इन समस्याओं से निपटने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और अधिक समर्थन की आवश्यकता है। हर छोटी सी मदद भी वहां के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।