कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: सचिन सिवाच, साक्षी और अंकुश ने बॉक्सिंग में भारत के लिए मेडल पक्के किए
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: सचिन सिवाच, साक्षी और अंकुश ने बॉक्सिंग में भारत के लिए मेडल पक्के किए
NewsPoint•
ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन जारी है. सचिन सिवाच, साक्षी और अंकुश ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर देश के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है. सचिन ने 60 किग्रा वर्ग में बोत्सवाना के मोरेमी ट्रेजर को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई, वहीं साक्षी ने 51 किग्रा वर्ग में नॉर्दन आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को मात दी. 80 किग्रा वर्ग में अंकुश ने सेशेल्स के जेड माइकोक को हराया. नरेंद्र भी 90 किग्रा+ वर्ग में समोआ के माइकल सेको को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने वाले आठवें भारतीय मुक्केबाज बने. इन जीत के साथ भारतीय मुक्केबाजी दल का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है और वे गोल्ड मेडल की उम्मीद कर रहे हैं.
सचिन सिवाच ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा क्वार्टर फाइनल के लिए रिंग में उतरने से पहले उन्हें थोड़ी घबराहट हो रही थी, लेकिन जैसे ही पहली घंटी बजी, उनकी सारी घबराहट हवा हो गई. उन्होंने बुधवार को बोत्सवाना के मोरेमी ट्रेजर को हराकर देश के लिए बॉक्सिंग में एक मेडल पक्का कर लिया है. भारतीय बॉक्सर ने शांत और सटीक प्रदर्शन करते हुए सर्वसम्मति से 5-0 से जीत हासिल की और सेमीफाइनल में जगह बनाई, जिससे देश के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया. जीत के बाद सचिन ने कहा, “मुकाबले से पहले मैं घबराया हुआ था, लेकिन पहली घंटी बजते ही सब बदल गया. एक बार मुकाबला शुरू होने के बाद, मेरा पूरा ध्यान अपनी बॉक्सिंग और गेम प्लान पर था.” आसान स्कोरलाइन के बावजूद, भारतीय बॉक्सर का मानना था कि इतने बड़े इवेंट में किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं लिया जा सकता. उन्होंने आगे कहा, “आपको कभी भी किसी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. यहां हर बॉक्सर उलटफेर करने में सक्षम है. मैंने अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान किया, धैर्य बनाए रखा और अपनी रणनीति पर अमल किया.” सचिन ने भारत के युवाओं के लिए एक दिल को छू लेने वाला संदेश भी दिया, जिसमें उन्होंने उनसे अनुशासित रहने और अपने माता-पिता के त्याग को समझने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “युवाओं के लिए मेरा संदेश है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और कड़ी मेहनत करें. अगर आप समर्पित रहते हैं और खुद पर विश्वास रखते हैं, तो एक दिन आप निश्चित रूप से सफलता हासिल करेंगे.”बुधवार को महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टरफाइनल में नॉर्दन आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराकर भारत के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है. इस जीत के बाद साक्षी ने कहा, “ये जीत मेरे लिए बहुत जरूरी थी, जिसके बाद मेरा पदक सुनिश्चित हो गया है. यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है. मैं लॉन्ग रेंज का गेम खेलना चाहती थी, जिसमें कामयाब रही. मुझे खुशी है कि कड़ी मेहनत और लोगों के सपोर्ट की बदौलत मैंने पदक सुनिश्चित किया है. मेरी कोशिश है कि इसे गोल्ड में बदलूं. मैं पूरे देश को यह जीत समर्पित करना चाहूंगी.” साक्षी ने बताया कि उन्होंने लंबी दूरी से लड़ने की रणनीति अपनाई और वह इसमें सफल रहीं. यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है और वह इस जीत को पूरे देश को समर्पित करना चाहती हैं.
80 किग्रा क्वार्टरफाइनल में अंकुश ने सेशेल्स के जेड माइकोक पर 5-0 से शानदार जीत हासिल की. इस जीत के बाद अंकुश ने कहा, “यह मेडल सुनिश्चित करने के बाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. अभी फाइनल तक का सफर बाकी है. मैं यह पदक अपने माता-पिता, परिवार और कोच को समर्पित करता हूं.” अंकुश इस मैच में एक खास वजह से दो अलग-अलग रंग के जूते पहनकर उतरे थे. उन्होंने बताया, “मेरे कोच ने मुझसे अलग-अलग रंग के जूते पहनने को कहा, और मैंने बस इतना कहा, ‘ठीक है’ आज गुरु पूर्णिमा है, और मेरे लिए मेरे कोच की बात ही आखिरी होती है.” उन्होंने आगे कहा कि वह सेमीफाइनल में और भी अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं और बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया उन्हें काफी सपोर्ट कर रहा है. अंकुश को पूरा भरोसा है कि वे यहां से गोल्ड मेडल लेकर जाएंगे.
नरेंद्र कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाले आठवें भारतीय मुक्केबाज रहे. उन्होंने बुधवार को पुरुषों के 90 किग्रा+ वर्ग के क्वार्टरफाइनल में समोआ के माइकल सेको को 3-2 के स्प्लिट डिसीजन (एक करीबी मुकाबले में जहां जजों के फैसले बंटे हुए थे) से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. मेडल सुनिश्चित करने के बाद नरेंद्र ने कहा, “मैंने सेको की बाउट देखी थी. हमने उनके खिलाफ योजना बनाई थी. मैंने उसी योजना के अनुसार खेला.” उन्होंने गुरु पूर्णिमा के मौके पर यह मेडल अपने कोच देवराज सर को समर्पित किया, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. नरेंद्र ने कहा, “हमें मेहनत करते रहनी चाहिए, हार-जीत तो होती ही रहती है. हालांकि, इंजरी से बचना बहुत जरूरी है.” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी की पिछली फाइट देखी थी और उसी के अनुसार अपनी रणनीति बनाई थी.
इन सभी मुक्केबाजों के प्रदर्शन से भारतीय दल का मनोबल काफी ऊंचा है. सचिन, साक्षी, अंकुश और नरेंद्र जैसे खिलाड़ियों ने न केवल मेडल पक्के किए हैं, बल्कि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने हैं. उनके संदेशों में अनुशासन, कड़ी मेहनत, माता-पिता का सम्मान और खुद पर विश्वास रखने की अहमियत पर जोर दिया गया है. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कोचों को समर्पित किए गए मेडल इस बात का प्रमाण हैं कि खिलाड़ी अपने गुरुओं के प्रति कितना सम्मान रखते हैं. बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के समर्थन से भारतीय मुक्केबाज गोल्ड मेडल जीतने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.