इंद्रेश कुमार का धर्मांतरण पर बयान: धर्मों का सम्मान हो, धर्मांतरण नहीं; यूसीसी का स्वागत करें
इंद्रेश कुमार का धर्मांतरण पर बयान: धर्मों का सम्मान हो, धर्मांतरण नहीं; यूसीसी का स्वागत करें
NewsPoint•
रायपुर, 29 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने सोमवार को रायपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मांतरण और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में धर्मों का सम्मान होना चाहिए, न कि धर्मांतरण। इंद्रेश कुमार के अनुसार, भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां सभी धर्मों और उपधर्मों का सम्मान किया जाता है, चाहे वे भारत में जन्मे हों या बाहर से आए हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी मौलिक स्वतंत्रता में कोई बाधा नहीं डालता और इसका विरोध केवल वोट-बैंक की राजनीति करने वाले राजनीतिक समूह कर रहे हैं।
इंद्रेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी देश में धर्मांतरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मों का सम्मान करना एक बुनियादी संवैधानिक मूल्य और मौलिक अधिकार है। भारत की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एकमात्र ऐसा देश है जहां भारत में उत्पन्न हुए सभी धर्म, जातियां और उपधर्म मौजूद हैं। इतना ही नहीं, जो धर्म भारत से बाहर जन्मे हैं, जैसे यहूदी, पारसी, मुस्लिम, ईसाई आदि, उन्हें भी यहां पूरी तरह से स्वीकार किया गया है। इसलिए, देश के अंदर धर्मांतरण की बजाय धर्मों का सम्मान होना चाहिए। यही सच्चा लोकतंत्र है। अगर हम इस रास्ते पर चलें तो एक मजबूत भारत बनेगा और शांति व सद्भाव का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि यह काम केवल भारत ही कर सकता है। इसलिए हमारा संदेश है कि धर्मों का सम्मान करें, धर्मांतरण नहीं।पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने की तैयारी के बीच इंद्रेश कुमार ने कहा कि हम एक देश हैं, एक जन हैं और एक ही झंडा है। हम भारत के लोग सब भारतीय हैं और हिंदुस्तानी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी भी मौलिक स्वतंत्रता में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। जातिगत और पंथगत भेद की स्वतंत्रताएं हर किसी की बनी रहेंगी। इसलिए, इस देश के अंदर जैन, बौद्ध, सिख, अंबेडकरवादी, आर्यसमाजी, सनातनी, कबीरपंथी, रविदासिया, जनजातियां, अनुसूचित समाज ने यूसीसी का विरोध नहीं किया है, क्योंकि उन्होंने इसका अध्ययन किया है। समस्या केवल कुछ राजनीतिक समूहों के साथ है, जो वोट-बैंक की राजनीति के लिए अल्पसंख्यकों को भड़काने की कोशिश करते हैं।
इंद्रेश कुमार ने कहा कि धीरे-धीरे संवाद के माध्यम से मुसलमानों को यह समझ में आ रहा है कि उन्हें वोट-बैंक की राजनीति में देश से अलग करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सभी मुसलमानों से भारतीय बनकर सोचने का आग्रह किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूरी दुनिया के किसी भी देश में मुसलमान की पहचान सिर्फ ‘मुसलमान’ के रूप में नहीं होती। अरब के व्यक्ति को अरब, तुर्की के व्यक्ति को तुर्क, ईरान के व्यक्ति को ईरानी और इराक के व्यक्ति को इराकी कहा जाता है। ठीक उसी तरह, किसी भी ईसाई बहुल देश में नागरिकों की पहचान सिर्फ ईसाई के रूप में नहीं होती, ब्रिटेन के व्यक्ति को ब्रिटिश, अमेरिका के व्यक्ति को अमेरिकी कहा जाता है। इसी प्रकार, भारत में किसी भी धर्म, जाति, भाषा, मूल-वंश या क्षेत्र के लोग हों, वे सभी भारतीय हैं। हम भारतीय थे, भारतीय हैं और भारतीय ही रहेंगे। कोई भी हमसे यह अधिकार नहीं छीन सकता।
उन्होंने आगे कहा कि यूसीसी से घबराना नहीं चाहिए। मुख्यधारा के नागरिक बनकर जीना चाहिए। हम विदेशी या किराएदार नहीं, इस देश के मूल नागरिक हैं। इसलिए यूसीसी का विरोध नहीं, बल्कि स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी मुसलमानों को राजनीतिक दलों ने विकास की मुख्यधारा से वंचित रखा। अब समय आ गया है कि वे मुख्यधारा में आकर जीएं।