संभल में बकरीद से पहले महंगाई का असर: बकरों की मंडी में खरीदार गायब, व्यापारी परेशान
संभल में बकरीद से पहले महंगाई का असर: बकरों की मंडी में खरीदार गायब, व्यापारी परेशान
NewsPoint•
संभल में ईद से पहले महंगाई का असर दिख रहा है। मंडी में महंगे बकरे खरीदारों का इंतजार कर रहे हैं। पशु व्यापारी परेशान हैं क्योंकि बकरों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। अच्छे बकरे बाहर के राज्यों में बिक गए। जो बचे हैं, वे ग्राहकों की पहुंच से बाहर हैं।
उत्तर प्रदेश के संभल में बकरीद से पहले महंगाई की मार साफ दिख रही है। मंडी में बड़े और महंगे बकरे तो हैं, लेकिन खरीदार नहीं पहुंच रहे। हालात ऐसे हैं कि 50 हजार रुपये का बकरा भी 30 हजार में नहीं बिक रहा है। पशु व्यापारी इस स्थिति से बहुत परेशान हैं। उनका कहना है कि बकरों को पालने-पोसने में जो खर्चा आया है, वह भी वसूल नहीं हो पा रहा है।
संभल जिले के हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन इलाके में रामा टॉकीज के पास लगी मंडी में इस बार अच्छी नस्ल के बड़े बकरे मौजूद हैं। लेकिन उनकी कीमतें आम ग्राहकों की पहुंच से बाहर हैं। पशु व्यापारियों का कहना है कि इस बार दिल्ली, मुंबई और दूसरे राज्यों में बकरों की मांग ज्यादा थी। इसी वजह से अच्छे दाम के लालच में कई व्यापारी अपने बकरे उधर ले गए। जो बकरे यहां बचे हैं, उनकी कीमत 25 हजार से 50 हजार रुपये तक बताई जा रही है।लेकिन ग्राहक इन कीमतों पर बकरे खरीदने को तैयार नहीं हैं। वे ज्यादा से ज्यादा 15 से 20 हजार रुपये ही देना चाहते हैं। सबसे महंगा अजमेरी नस्ल का बकरा, जिसकी कीमत 50 हजार रुपये बताई जा रही थी, अब 30 से 35 हजार रुपये में भी बिकने को तैयार है। लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि बकरों को तैयार करने में काफी पैसा लगा है। लेकिन मौजूदा हालात में तो लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। ग्राहक मंडी में आ तो रहे हैं, लेकिन सिर्फ दाम पूछकर चले जाते हैं।
संभल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में लोग इन दिनों महंगाई से जूझ रहे हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से सब्जी, फल और दूसरी चीजों के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। बकरीद पर भी इसका असर साफ दिख रहा है। बकरों के दाम के साथ-साथ दूसरी जरूरी चीजें भी महंगी हो गई हैं। इस वजह से कई लोग तो बकरा खरीद ही नहीं पा रहे हैं। पशु व्यापारियों को भी इस बार काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एक पशु व्यापारी ने बताया, "हम लोग बकरों को पालने में बहुत मेहनत करते हैं। उन्हें खिलाते-पिलाते हैं। लेकिन जब दाम ही नहीं मिलते तो क्या करें? इस बार तो लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।" दूसरे व्यापारी ने कहा, "ग्राहक आते हैं, बकरों को देखते हैं, दाम पूछते हैं और फिर चले जाते हैं। लगता है कि इस बार बकरीद फीकी ही रहेगी।"
महंगाई का असर सिर्फ बकरों पर ही नहीं, बल्कि दूसरी चीजों पर भी दिख रहा है। बकरीद के लिए जरूरी सामान जैसे कपड़े, सजावट का सामान और खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो गई हैं। इससे लोगों का बजट बिगड़ गया है। कई लोग तो इस बार बकरीद मनाने के बारे में भी सोच रहे हैं कि कैसे मनाया जाए।
यह स्थिति पशु व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है। वे उम्मीद कर रहे थे कि बकरीद पर उनके बकरे अच्छे दाम में बिकेंगे और उनका नुकसान पूरा होगा। लेकिन महंगाई की मार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में हालात सुधरते हैं या नहीं।