ईरान संघर्ष को लेकर ब्रेट मैकगर्क ने दी चेतावनी, अमेरिका की अगली सरकार को भी झेलना होगा दबाव

NewsPoint•
Navbharat Times
वॉशिंगटन में मिडिल ईस्ट के मामलों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ब्रेट मैकगर्क ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का सिलसिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक जारी रह सकता है। साथ ही, अगली अमेरिकी सरकार को भी इस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। मैकगर्क ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ किसी स्थायी समाधान की उम्मीद नहीं है, जबकि ट्रंप प्रशासन इस समस्या पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में पिछले कई दशकों से ईरान का मुद्दा लगातार चुनौती बना हुआ है।

मैकगर्क, जो राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के लिए कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं, ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन काफी बदल गया है। उन्होंने दो प्रमुख सैन्य अभियानों का उल्लेख किया: पहला, ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' और दूसरा, इस साल फरवरी से शुरू हुआ मौजूदा संघर्ष।
उनके अनुसार, "अगर मुझे अनुमान लगाना हो, तो यह मामला ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिर तक चलता रहेगा और फिर अगले राष्ट्रपति को भी ईरान की इस पुरानी समस्या से निपटना होगा।" मैकगर्क ने लगातार टकराव का संकेत देते हुए कहा कि स्थिति तब तक नहीं बदल सकती जब तक ईरान की राजनीतिक प्रणाली में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो जाता। उन्होंने फिर से कहा, "मुझे लगता है कि हम ऐसे दौर में हैं, जो कुछ समय तक चलने वाला है।"

मैकगर्क ने आगे बताया कि ईरान पर भारी आर्थिक दबाव बना रहेगा, और दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई भी हो सकती है। कभी-कभी सीजफायर या अंतरिम समझौतों की संभावना भी हो सकती है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के होने को कठिन बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के अधिकारी शायद ईरान के परमाणु हथियार बनाने को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी गारंटी मानते हैं।

इसी बीच, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के मामले में सैन्य और कूटनीतिक दोनों रूख अपनाए हैं। जरुरत पड़ने पर अमेरिका अतिरिक्त रक्षा उपकरण भेज रहा है। राइट ने कहा, "ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता और उसे इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी।"

उन्होंने कहा, "इसलिए हम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर रास्ते पर विचार कर रहे हैं।" अप्रैल 2023 में ईरान के खिलाफ कार्रवाई के संदर्भ में पूछे जाने पर, राइट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले से ही उनकी योजनाओं के बारे में अनुमानों को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाए हैं।

उन्हें उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आएगी। उनका कहना है कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई बढ़ने और अमेरिका में पेट्रोल के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण हो सकता है। राइट ने कहा कि ट्रंप ऊर्जा की कीमतों के मामले में जानते थे कि उनके फैसलों से कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन सही निर्णय लेना अधिक महत्वपूर्ण था।

इसके अलावा, मिडटर्म चुनावों से एक महीने पहले ईरान संघर्ष का राजनीतिक प्रभाव भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हाल के मीडिया सर्वे में पाया गया कि हर 10 में से 9 मतदाताओं का मानना है कि ईरान संघर्ष के कारण अमेरिका में गैस और तेल की कीमतें बढ़ी हैं। न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी ने कहा कि बढ़ती कीमतों और ईरान के युद्ध का असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि 66 प्रतिशत लोग ट्रंप के ईरान से निपटने के तरीके को नापसंद करते हैं। इस संघर्ष का असर उन क्षेत्रों में अधिक दिखाई दे रहा है जहां बड़ी संख्या में सैनिक निवासी हैं। इस प्रकार, ईरान का मुद्दा न केवल विदेशी नीति का, बल्कि आंतरिक राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

मैकगर्क का यह बयान कई मामलों का संज्ञान लेने वाला है। उन्होंने ईरान की उन नीतियों पर व्यापक रूप से विचार किया है जो समर्थन और सुरक्षा के आधारीय सिद्धांतों पर आधारित हैं। वो मानते हैं कि यह टकराव केवल अमेरिकी राजनीति की वजह से नहीं है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है।

इस संघर्ष में अमेरिकी प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल किया है। ट्रंप और उनके प्रशासन के कदम सीधे तौर पर इन नीतियों की प्रतिक्रिया में आए हैं। यही वजह है कि अमेरिका खुद को एक मजबूत और निर्णायक उपाय के रूप में पेश करना चाहता है।

राइट ने बताया कि ईरान के संबंध में अमेरिका की स्थिति स्पष्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य उपायों को हमेशा खुले रखना महत्वपूर्ण है ताकि आवश्यकता पड़ने पर सही समय पर जवाब दिया जा सके।

कुल मिलाकर, ईरान के साथ टकराव का मामला प्रदीप्त है। यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि शक्ति संतुलन और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। मैकगर्क और राइट के बयान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं दिखाई देता है। यह स्थिति अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले समय में और भी जटिल हो सकती है।

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