पूर्ण शलभासन: योग का प्रभावशाली आसन जो रीढ़ और शरीर को मजबूत बनाता है
पूर्ण शलभासन: योग का प्रभावशाली आसन जो रीढ़ और शरीर को मजबूत बनाता है
NewsPoint•
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। योग शास्त्र में कई आसन हैं जो शरीर की लचक बढ़ाते हैं और आंतरिक अंगों को मजबूत बनाते हैं। इनमें से एक आसन है 'पूर्ण शलभासन', जो न केवल रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा भी देता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के अनुसार, यह आसन एक प्रकार का उन्नत योग है जिसे नियमित अभ्यास से आसानी से किया जा सकता है।
पूर्ण शलभासन का नाम संस्कृत शब्द 'शलभ' से आया है, जिसका मतलब है 'टिड्डी' और 'पूर्ण' का मतलब है 'संपूर्ण'। जब आप इस आसन की अंतिम स्थिति में होते हैं, तो आपका शरीर उड़ने वाली टिड्डी की तरह दिखता है। यह आसन सुनने में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, पर अगर नियमित अभ्यास किया जाए तो इसे आसानी से किया जा सकता है। यह आसन पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इस आसन का अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और यह मजबूत बनती है। जब आप इसे करते हैं, तो पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। इससे पीठ के आसपास बेहतर रक्त प्रवाह होता है। जिससे दर्द, अकड़न और थकान में राहत मिलती है। यही नहीं, इससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। पेट पर होने वाले दबाव के कारण यह कब्ज को दूर करने में भी मदद करता है और पाचन क्षमता को अच्छा बनाता है।
हालांकि, जो लोग शुरुआती हैं, उन्हें इस आसन का अभ्यास योग गुरु की देखरेख में करना चाहिए। अगर आपको गंभीर कमर दर्द, साइटिका, उच्च रक्तचाप, हर्निया या पेप्टिक अल्सर है, तो यह आसन आपके लिए नहीं है।
इसलिए, पूर्ण शलभासन न केवल एक मजेदार योग आसन है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है। नियमित अभ्यास से आप अपनी शक्ति और ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं। यदि आप इसके लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें और महसूस करें कि आपके शरीर में कितनी सकारात्मक बदलाव होते हैं।