ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला: समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह पर खुलासा
ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला: समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह पर खुलासा
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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर जोरदार आरोप लगाए हैं। राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी को पहले अपने नेताओं में एकता और अनुशासन लाना चाहिए, बजाय इसके कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने का सपना देखे। राजभर ने यह बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की हैं।
राजभर ने अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए लिखा कि "अखिलेश जी, आपके इंडी को लड़ना है एनडीए से और आपके नेता आपसे में लड़ रहे हैं।" उन्होंने सपा के नेताओं के बीच हो रहे विवादों का जिक्र करते हुए चुटकी ली कि पार्टी खुद अंदरूनी लड़ाई लड़ रही है। जैसे, “सपा लड़ रही कांग्रेस से, इकरा लड़ रहीं इमरान से, गौतम जी तो सबको ही निशाने पर लिए हुए हैं। बाकी आपके संगठन वाले तो आ-हा-हा।”राजभर ने कहा कि बयानबाजियों से अलग सपा के भीतर जूतम-पैज़ार भी हो रहा है। उन्होंने गोरखपुर में हुए थप्पड़ कांड का हवाला देते हुए कहा कि मुकदमा दर्ज हो चुका है और हालत ऐसी बन गई कि सपा को अपने जिलो और फ्रंटल संगठनों तक की इकाइयां भंग करनी पड़ीं। उन्होंने एटा और कासगंज के नेताओं के आपसी झगड़े का उल्लेख किया और कहा कि बैठक के बाद दोनों जिलों की इकाइयां भंग करनी पड़ीं।
आगरा में भी उनके सांसद की मौजूदगी में मथुरा के पदाधिकारी आपस में भिड़ गए, जहाँ लात-घूंसे चले और परिणामतः दो नेताओं को पार्टी से बाहर निकालना पड़ा। राजभर ने कहा कि आजमगढ़ में बूथ अध्यक्ष ने अपने विधायक के समर्थकों पर मारपीट का आरोप लगाया। इसके अलावा, सहारनपुर में प्रदेश अध्यक्ष के सामने हुई समीक्षा बैठक में कुर्सी और माइक के लिए खुद के लोग उलझ गए।
राजभर ने फिर से अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "अखिलेश जी, 2027 में प्रदेश संभालने का दावा है और 2026 में अपनी जिला इकाइयां संभालने के लिए कभी संगठन भंग करना पड़ रहा है, कभी नेताओं को पार्टी से निकालना पड़ रहा है।" उन्होंने कहा कि जो स्थिति समाजवादी पार्टी में है, उस पर विचार करें। यदि यह चीर-फाड़ सरकार में आ गए, तो वे जनता को कितना परेशान करेंगे। "हफ्ता वसूली करेंगे, गुंडा टैक्स वसूलेंगे।"
उन्होंने अंत में सलाह दी कि पहले अपने नेताओं को एकजुट होना सिखाएं। उन्हें सभ्यता-संस्कार और अनुशासन सिखाएं। चुनाव तो बाद में लड़िएगा। अपने संदेश का समापन करते हुए उन्होंने कहा, “जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण, जय परशुराम, जय महाराजा सुहेलदेव!”