ऑस्ट्रेलिया में फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट द्वारा हमले की जांच शुरू, कैप्टन ने 170 यात्रियों की जान बचाई

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नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्लाईदुबई फ्लाइट एफजेड1073 में एक गंभीर घटना हुई। इस उड़ान के कैप्टन, स्मित मच्छार पर उनके को-पायलट ने क्रैश करने की कोशिश करते हुए हमला किया। यह घटना तब हुई जब विमान तेल अवीव जा रहा था। इस हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया ने मामले की जांच शुरू कर दी है। को-पायलट की पहचान ओमान के 29 वर्षीय हमाम अल-हम्मामी के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह दो साल पहले ऑस्ट्रेलिया में एक छात्र के रूप में पढ़ाई कर चुका था।

कैप्टन मच्छार ने केवल अपनी जान ही नहीं, बल्कि फ्लाइट में मौजूद 170 यात्रियों की जान भी बचाई। उनके गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जर्मन अखबार द गार्जियन ने बताया है कि को-पायलट अल-हम्मामी को 2014 में ऑस्ट्रेलियाई छात्र वीजा मिला था। उन्होंने वहाँ इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। हालांकि, उनका वीजा 2019 में रद्द हो गया था।
संयुक्त अरब अमीरात, जो मामले की जांच कर रहा है, ने इस घटना को आतंकी हमला करार दिया। इस बीच, जब को-पायलट ने हमला किया, तब फ्लाइट के क्रू और इजरायली यात्रियों के बीच भी झड़प हुई। जब यात्रियों ने को-पायलट को काबू में कर लिया, तो क्रू के सदस्यों ने उन्हें अपहरणकर्ता को छोड़ने के लिए कहा। इस पर यात्रियों ने नाराजगी जताई। एक इजरायली यात्री, त्ज्विका मानेस ने कहा, "क्रू हमसे बार-बार कह रहा था कि आतंकी को खोल दो, हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्यों।"

एक और यात्री, डैनियल श्लिचटर ने बताया कि क्रू के सदस्यों ने कहा कि उन्हें अपहरणकर्ता की जानकारी को साझा करनी चाहिए। यह सुनकर यात्रियों को शक हुआ। इस बहस में यात्रियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर को-पायलट को नहीं छोड़ेंगे।

अल-हम्मामी, जिसे काबू किया गया था, वीडियो में दिख रहा था। उसे घुटनों के बल बैठे हुए देखा गया, उसके हाथ पीछे बंधे थे और उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे। इस वीडियो में यात्री बार-बार यह कहते सुनाई दिए, "केवल पुलिस"। यह दर्शाता है कि उनका उद्देश्य केवल उसे कानून प्रवर्तन के हवाले करना था, ना कि उसे चोट पहुंचाना।

इस घटना ने न केवल विमान यात्रा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि यात्रियों की एकजुटता और साहस ने कठिन परिस्थिति में कैसे काम किया। कैप्टन मच्छार ने अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की, जबकि यात्रियों ने तूफानी हालत में सुरक्षित रूप से स्थिति को संभाला।

यह घटना यह सोचने के लिए मजबूर करती है कि हम ऐसी विपरीत स्थितियों में कैसी प्रतिक्रियाएं दिखा सकते हैं। हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। इस घटना से यह स्पष्ट है कि सुरक्षा के लिए सभी को एक साथ आने की जरूरत है।

अंत में, यह घटना एक महत्वपूर्ण सबक है कि हर स्थिति में धैर्य और साहस बरकरार रखना चाहिए। अगर कोई दिक्कत आती है, तो हमें मिलकर उसका सामना करना चाहिए। ऐसी घटनाएं हमें एकजुट होकर खड़े होने की प्रेरणा देती हैं। हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।

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