बीसीसीआई ने वीवीएस लक्ष्मण को सीनियर पुरुष चयन समिति की बैठकों में शामिल होने का नियम बनाया

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Navbharat Times
भूतल में, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का एक नया नियम सामने आया है। बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण अब सीनियर पुरुष राष्ट्रीय सिलेक्शन कमेटी की बैठक में भाग लेंगे। यह निर्णय पिछले महीने मुंबई में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया था। लक्ष्मण को गुवाहाटी में सीनियर पुरुष टीम की चयन बैठक में भी देखा गया। इसमें सैकिया, प्रज्ञान ओझा, एसएस दास, अजय रात्रा और आरपी सिंह जैसे सदस्य शामिल थे। यह सभी न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 और रेड-बॉल ए सीरीज के लिए टीम की चयन के लिए इकट्ठा हुए थे।

सैकिया ने बताया, “वीवीएस लक्ष्मण मंगलवार की बैठक में इसलिए मौजूद थे ताकि टीम चुनते समय सिलेक्टर्स और सीओई के बीच कोई गलतफहमी न हो। वह Bengaluru में बीसीसीआई सीओई में क्रिकेट के हेड हैं और अब से वह सीनियर पुरुष टीम की सिलेक्शन की सभी बैठकों में शामिल होंगे। उन्हें खिलाड़ियों की चोटों के बारे में पूरी जानकारी है, और किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए लक्ष्मण को आगे पुरुष टीम की सिलेक्शन बैठकों में शामिल होना चाहिए। यह फैसला पिछले महीने मुंबई में हुई रिव्यू मीटिंग के बाद लिया गया था (जिसमें लक्ष्मण भी मौजूद थे)।”
हाल के दिनों में, कई बार खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर उलझनें देखने को मिली हैं। कभी-कभी खिलाड़ियों को टीम में रखा गया, लेकिन दौरे से पहले उनकी फिटनेस ठीक नहीं रही जिससे उन्हें बाहर करना पड़ा। इसे देखते हुए, बीसीसीआई सचिव ने कहा, “यह पारदर्शिता की बात नहीं है। असल में, इसका मकसद यह पक्का करना है कि सिलेक्टरों को खिलाड़ियों और उनकी फिटनेस के बारे में पूरी और सही जानकारी मिले, ताकि वे सही फैसले ले सकें।”

यह नया नियम केवल सीनियर पुरुष टीम की सिलेक्शन मीटिंग पर लागू है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था सीनियर महिला टीम की सिलेक्शन मीटिंग के लिए भी होगी या नहीं। पिछले कुछ समय में, चोटों की वजह से कई महिला खिलाड़ियों की उपलब्धता पर असर पड़ा है।

इससे साफ है कि बीसीसीआई अब खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बहुत अधिक सजग हो गया है। इससे टीम चयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलतफहमियों से बचा जा सकेगा। उम्मीद है कि इस नए नियम का लाभ भविष्य मे टीम चयन में मिलेगा और सही मायनों में फिट खिलाड़ियों को मौका मिलेगा।

इस नए बदलाव से बीसीसीआई में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है। इससे खिलाड़ियों और चयनकर्ताओं के बीच संवाद बेहतर होगा। यह कदम निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट के भविष्य को प्रभावित करेगा।