आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों में कटौती की संभावना पर दी स्पष्टता, रेपो रेट 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि मौजूदा आर्थिक स्थितियों के चलते ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय बैंक ने ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी ‘संतुलित सख्ती’ अपनाने का निर्णय लिया है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक के बाद गवर्नर ने बताया कि भविष्य में या तो रेपो रेट में बढ़ोतरी होगी या फिर इसे स्थिर रखा जाएगा। फिलहाल ब्याज दरों में कटौती किसी भी विकल्प में शामिल नहीं है।

गवर्नर ने बताया कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र कितना लंबा चलेगा, यह महंगाई और वृद्धि के वास्तविक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। उन्होंने जानकारियों को साझा करते हुए कहा, “आरबीआई को उम्मीद है कि अगली तीन तिमाहियों में औसत सीपीआई मुद्रास्फीति लगभग 5.8 प्रतिशत रहेगी।” इसके साथ ही, चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति का अनुमान 4.94 प्रतिशत रहने का है। गवर्नर ने कहा कि आरबीआई ने मौद्रिक नीति में बदलाव के तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर को 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर एवं बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया है।
मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि निजी खपत में लगातार मजबूती बरकरार है और विवेकाधीन खर्च इसको समर्थन कर रहा है। इसके अलावा, स्थायी निवेश भी कई आर्थिक संकेतकों के मुताबिक मजबूत दिख रहा है। फिर भी, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों जैसे गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं और घरेलू हवाई यातायात में कमजोरी के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

आरबीआई के अनुसार, सेवा क्षेत्र में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और घरेलू तथा वैश्विक मांग इसका समर्थन कर रही है। दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और सर्विसेज पीएमआई दोनों ही विस्तार क्षेत्र में बने रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। मौद्रिक नीति समिति ने फाइनेंसियल स्थितियों की समीक्षा के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।

इस तरह से आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि ब्याज दरों में कटौती का विचार नहीं है और मौद्रिक नीति में संतुलित सख्ती रखने का निर्णय लिया गया है। यह सभी जानकारियाँ अर्थव्यवस्था के वर्तमान स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।