पीएम मोदी ने विकसित India के लक्ष्यों और समाज को जोड़ने की प्रवृत्तियों पर बात की
पीएम मोदी ने विकसित India के लक्ष्यों और समाज को जोड़ने की प्रवृत्तियों पर बात की
NewsPoint•
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में ‘विकसित इंडिया संकल्प सभा’ को संबोधित किया। इस सभा में उन्होंने भारत के भविष्य के लिए कुछ बड़े लक्ष्य पेश किए। उन्होंने कहा कि देश में जो ऊर्जा और आत्मविश्वास है, वह अद्भुत है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि “2047 तक विकसित इंडिया बनाना है, हम करके दिखाएंगे। दुनिया की टॉप 3 अर्थव्यवस्था बनना है, हम करके दिखाएंगे। आत्मनिर्भर इंडिया बनाना है, हम करके दिखाएंगे।” इसके साथ ही उन्होंने भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने, ओलंपिक का आयोजन करने और अंतरिक्ष में बड़े कदम रखने जैसे लक्ष्यों की भी चर्चा की।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि “जिस राष्ट्र के लोगों की धमनियों में ऐसा आत्मविश्वास लहू बनकर दौड़ता है, उसे कोई रोक नहीं सकता।” उन्होंने अपने राजनीति सफर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कभी पद के लिए नहीं जिए। “मेरा Political रिपोर्ट कार्ड सिर्फ संगठन का काम करने वाले का ही था। मैंने चुनाव लड़ाए थे लेकिन एक भी चुनाव नहीं लड़ा था। चुनावी राजनीति में चमकने की चाहत होती, तो बहुत पहले ही मैदान में उतर सकता था लेकिन ये मेरा मिजाज नहीं था,” उन्होंने यह भी बताया।प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का एक ही ध्येय था, वह है देश के लिए निश्वार्थ कर्म। “मेरे लिए कर्म ही सब कुछ है, कर्म ही मेरा धर्म है। मुझे जो भी जिम्मेदारियां मिली, मैं उन्हें निभाता चला गया,” उन्होंने आगे कहा। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब वह वडनगर के स्कूल में पढ़ते थे, तब वह हमेशा पहले आने वाले विद्यार्थियों में होते थे। “सीखने की वो ललक मेरे जीवन का हिस्सा बन गई,” उन्होंने बताया।
पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ। ऐसे अनगिनत स्वयंसेवक हैं जो India की सांस्कृतिक आत्मा के संरक्षक हैं।” उन्होंने उन सभी स्वयंसेवकों को सम्मानपूर्वक नमन किया, जो देश की सेवा में समर्पित हैं। उन्होंने कहा, “आज का ये दिन सिर्फ यादों के लिए नहीं है। ये अपने संकल्पों को नई ऊर्जा से भरने का दिन है।”
सभा में पीएम ने लाल किले से दिए गए ‘सबका प्रयास’ के मंत्र को याद किया। उन्होंने कहा, “India को नई बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए जो जोश और जज्बा चाहिए, वो एक ही संदेश देता है कि हम करके रहेंगे।” उन्होंने कर्म पर जोर देते हुए कहा कि, “मेरा अधिकार मेरे कर्म पर है, इसलिए मैं कर्म को अपना कर्तव्य मानता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि “कर्म करो, काम रुकना नहीं चाहिए, प्रयास रुकना नहीं चाहिए।”
पीएम मोदी ने भारत की तरक्की के विषय में भी बात की। उन्होंने कहा, “कभी India की सोलर पावर क्षमता का दुनियाभर में चर्चा का विषय बनना अकल्पनीय लगता था। आज India दुनिया के प्रमुख सोलर पावर उत्पादकों में से एक है।” उन्होंने खेती-बाड़ी के क्षेत्र में भी बदलावों की तारीफ की। “2015 से 2025 के दशक में आजादी के बाद से खेती में सबसे ज्यादा और लगातार बढ़ोतरी देखी गई,” उन्होंने बताया। उनका कहना था कि जब इरादा साफ हो और नीतियां निर्णायक हों, तो ऐसा ही होता है।
उन्होंने समाज को बांटने की राजनीति पर भी प्रकाश डाला। पीएम मोदी ने कहा, “हमारे देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है समाज को वोट के आधार पर बांटने की प्रवृत्ति। हालांकि जब किसी किसान के खेत में पानी की कमी होती है, तो क्या यह समस्या सिर्फ एक जाति को प्रभावित करती है?” इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “नहीं। अगर समस्या सबकी है, तो समाधान भी सबके लिए होना चाहिए।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज के सभी वर्गों के मुद्दों को समान महत्व देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जब बात देश की होती है, तो “पद, प्रतिष्ठा, अधिकार का कोई महत्व नहीं रहता। हमने इस अनादि राष्ट्र में जन्म लिया है, ये एहसास ही अमृत है।” उनका कहना था कि “पद और प्रतिष्ठा तो दुनिया में कहीं भी मिल सकती है लेकिन India जैसी पुण्य भूमि नहीं मिलेगी।”
अंत में, पीएम मोदी ने कहा कि “उस राष्ट्र की सेवा का अवसर मिलना ही अमूल्य है।” उन्होंने अपने उद्देश्यों का संकल्प दोहराया, ताकि सभी भारतीय उनकी बातों से प्रेरित होकर मिलकर आगे बढ़ें। यह सभा जनता को आश्वस्त करने का एक प्रयास था कि प्रधानमंत्री अपने कर्म के प्रति निष्ठावान हैं और देश के विकास के लिए समर्पित हैं।
इस सभा ने लोगों में आशा जगाई है कि यदि हम मेहनत करेंगे और एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे, तो भारत को 2047 तक विकसित बना सकते हैं। सभी ने पीएम मोदी के इस संकल्प को ध्यान से सुना और अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सभा के माध्यम से देशवासियों को फिर से एक स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी मेहनत और समर्पण ही भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।