जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले में प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारियों का बड़ा खुलासा
जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारियों का बड़ा खुलासा
NewsPoint•
जेपीएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। यह मामला तब सामने आया जब जांच एजेंसियों ने पाया कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग के लिए भेजे जाने के दौरान ही लीक हो गया था। जानकारी के अनुसार, प्रिंटिंग कंपनी के दो कर्मचारियों ने प्रश्नपत्र की फोटो खींच ली थी। इसके बाद यह पेपर लीक होने का संदेह पैदा हुआ। अब जांच जारी है ताकि पता चल सके कि यह लीक किस प्रकार हुआ और इसके पीछे की कहानी क्या है।
जांच में पाया गया है कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा को लेकर जो गोपनीयता बरती जानी थी, वह प्रिंटिंग के स्तर पर ही टूट गई थी। प्रिंटिंग एजेंसी के दो कर्मचारियों ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन से लीं। इसके बाद, इन तस्वीरों को किसके पास भेजा गया, इस पर भी सवाल उठ रहा है। जांच एजेंसियां अब यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इन कर्मचारियों ने क्यों तस्वीरें खींचीं और उन्हें किस-किस व्यक्ति तक भेजा गया। इससे यह भी पता चलेगा कि क्या इन तस्वीरों के बदले में कोई लेन-देन हुआ था या नहीं।इससे पहले भी जेपीएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर पेपर लीक की चर्चा चल रही थी। अब प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। अधिकारी यह जानने के लिए भी जांच कर रहे हैं कि प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग, पैकिंग और संबंधित केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां चूक हुई।
जांच एजेंसियां इन दोनों कर्मचारियों से पूछताछ भी कर सकती हैं। इसके साथ ही उनके मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की छानबीन की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि तस्वीरें कब खींची गईं और इन्हें किस माध्यम से आगे भेजा गया।
फिलहाल जांच जारी है। इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। यदि जांच में पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है। परीक्षा की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए यह जरूरी है कि जांच एजेंसियां लीक के पूरे नेटवर्क तक पहुंचे।
इस तरह की घटनाएं अभ्यर्थियों के लिए आशंका का कारण बनती हैं। इसलिए, सभी पार्टियों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले की सही और संपूर्ण जांच हो। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति टाली जा सके।